छत्तीसगढ़ी मया अउ माटी के सम्मान बर विधायक कविता प्राण लहरे के पहल सराहनीय, जनप्रतिनिधि अपनावंय छत्तीसगढ़ी में पत्राचार की परंपरा – तरुण कौशिक।

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कबीरधाम, धनंजय साहू, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के सम्मान और जनसरोकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक कविता प्राण लहरे द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को विधायक आवास निर्माण के लिए नकटी गांव के गरीब परिवारों के मकानों को तोड़े जाने के मामले में छत्तीसगढ़ी भाषा में पत्र लिखकर आवाज उठाए जाने की पहल को व्यापक समर्थन मिल रहा है।इस संबंध में सर्वव्यापी समाचार पत्र के संपादक एवं छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष तरुण कौशिक ने विधायक कविता प्राण लहरे के प्रति आभार एवं सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी मातृभाषा में शासन-प्रशासन से संवाद स्थापित करना छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अस्मिता और पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विधायक कविता प्राण लहरे ने न केवल गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज को बुलंद किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को भी नई ऊंचाई प्रदान की है।तरुण कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण यहां की संस्कृति, परंपरा और छत्तीसगढ़िया अस्मिता को सशक्त करने के उद्देश्य से हुआ था। ऐसे में जब प्रदेश के निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी में पत्राचार करते हैं, तो इससे आम जनता और शासन के बीच आत्मीयता और विश्वास का संबंध और अधिक मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि विधायक कविता प्राण लहरे की यह पहल प्रदेश के सभी निर्वाचित विधायक, सांसद और मंत्रियों के लिए प्रेरणास्रोत है।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर यथासंभव छत्तीसगढ़ी भाषा में पत्राचार करना चाहिए, ताकि मातृभाषा को व्यवहारिक और प्रशासनिक स्तर पर भी उचित सम्मान प्राप्त हो सके। इससे आने वाली पीढ़ियों में भी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित होगी।तरुण कौशिक ने कहा कि नकटी गांव के गरीब परिवारों के आवासों को लेकर उठाया गया मुद्दा केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार करेंगे और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने अंत में कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी माटी, संस्कृति और भाषा से है तथा विधायक कविता प्राण लहरे द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए पत्र ने यह संदेश दिया है कि जनप्रतिनिधियों को अपनी मातृभाषा के सम्मान और जनभावनाओं के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।


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