विकास नंद/सर्वव्यापी
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद द्वारा जिले में निरंतर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिता डहरिया के मार्गदर्शन में न्यायिक अधिकारियों एवं अधिकार मित्रों के माध्यम से आमजन और विद्यार्थियों को सरल भाषा में कानूनी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।इसी क्रम में स्थानीय मौहारी भाठा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी ने छात्राओं को कानून से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया। उन्होंने बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा तथा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों की जानकारी सरल एवं सहज भाषा में दी।कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने कानून से जुड़े कई जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका भतपहरी ने विस्तारपूर्वक और सरल भाषा में उत्तर दिया। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता एवं परामर्श की जानकारी देते हुए कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि आर्थिक या अन्य किसी अक्षमता के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(ए) के तहत सभी नागरिकों के लिए समान न्याय और गरीब एवं कमजोर वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम लागू किया गया, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तालुका विधिक सेवा समितियों का गठन किया गया है।उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता, सलाह और न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना तथा विधिक जागरूकता के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है।अधिकार मित्र हरिचंद साहू ने बताया कि जिले में विभिन्न जागरूकता विषयों पर आधारित ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक कानूनी जानकारी पहुंचाई जा सके।