वनमंडल में पौधा तैयारी के नाम पर करोड़ों के कथित फर्जीवाड़े का आरोप, जांच प्रतिवेदन में अनियमितताओं का उल्लेख।

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नूर मोहम्मद/श्रीनिवास सुमेर, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल में पौधा तैयारी कार्य के नाम पर कथित रूप से करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर आरोप लगाया गया है कि पौधा उत्पादन एवं संबंधित व्ययों में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।जांच प्रतिवेदन के अनुसार, मरवाही वनमंडल के अंतर्गत संचालित कुछ केंद्रीय रोपणियों में कुल 1,06,606 पौधों की तैयारी अभिलेखों में दर्शाई गई, जबकि जांच के दौरान इन पौधों के वास्तविक रूप से तैयार नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फर्जी बिल-वाउचर और अभिलेखों के माध्यम से शासकीय राशि के दुरुपयोग का प्रयास किया गया।जांच प्रतिवेदन में केंद्रीय रोपणी छिछगोहना के प्रभारी शिवशंकर तिवारी एवं राकेश पंकज (वनरक्षक) तथा केंद्रीय नर्सरी साधवानी के रोपणी प्रभारी राकेश राठौर (वनरक्षक) के संबंध में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।विभागीय सूत्रों का कहना है कि पूर्व में विभिन्न मामलों में आरोपों और विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके कुछ कर्मचारियों को नियमों की अनदेखी कर महत्वपूर्ण प्रभार सौंपे गए। आरोप है कि इससे विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिवशंकर तिवारी पर पूर्व में कटघोरा वनमंडल के पसान परिक्षेत्र में पदस्थापना के दौरान हाथी द्वारा फसल क्षति मुआवजा वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसी प्रकार, राकेश राठौर के संबंध में भी पूर्व में विभागीय स्तर पर कार्रवाई और अनियमितताओं के आरोपों का हवाला दिया गया है। हालांकि, इन मामलों की वर्तमान स्थिति और अंतिम विभागीय निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच प्रतिवेदन में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों का मनोबल बढ़ सकता है। अब सभी की नजर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी है कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और जांच प्रतिवेदन के आधार पर क्या निर्णय लिया जाता है।


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