विकास नंद/सर्वव्यापी

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में महासमुंद जिले में जल संरक्षण की दिशा में चलाया जा रहा ‘मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0’ उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के समन्वय से जिले की सभी 551 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के व्यापक कार्य किए गए हैं। पहली ही बारिश में इन संरचनाओं में जल भराव होने से लगभग 31 करोड़ लीटर पानी के भंडारण की क्षमता विकसित हुई है, जो जिले के भू-जल स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर जिले में जनभागीदारी के साथ बोरी बंधान, डब्ल्यू.ए.टी., एस.सी.टी., सोख्ता गड्ढे, 5 प्रतिशत मॉडल, ब्रश वुड जैसी लघु जल संरक्षण संरचनाओं के साथ-साथ मनरेगा के माध्यम से गेबियन, एल.बी.सी.डी., डाइक, आजीविका डबरी, नवा तरिया, जल अवशोषण खंती, सतत कंटूर ट्रेंच, कुएं निर्माण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्य बड़े पैमाने पर कराए गए।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार के मार्गदर्शन में एक ही वित्तीय वर्ष में 36 हजार जल अवशोषण खंतियां, 8,200 स्टैगर्ड ट्रेंच, 30 हजार सतत कंटूर ट्रेंच, 51 डाइक, 52 गेबियन तथा 800 आजीविका डबरी सहित हजारों जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। मानसून की पहली बारिश में इन सभी संरचनाओं में पर्याप्त जल भराव होने से वर्षा जल का अपव्यय रुककर भू-जल पुनर्भरण को मजबूती मिली है।कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ‘मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0’ के माध्यम से जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहली ही बारिश में जल संरक्षण संरचनाओं का भर जाना अभियान की सफलता का प्रमाण है और यह महासमुंद जिले को जल सुरक्षा की दिशा में नई पहचान दिलाएगा।


