तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल में कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और जांच प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि वन विभाग से संबंधित विभिन्न शिकायतों और आरोपों के बावजूद अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले में मरवाही वन मंडल की वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) ग्रीष्मी चांद की प्रशासनिक छवि को प्रभावित करने के प्रयासों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, मरवाही वन मंडल में पौधारोपण, वन प्रबंधन और अन्य कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें शासन स्तर तक पहुंची थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, इन निर्देशों के कई महीने बाद भी जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच के आदेश जारी किए गए थे, तो निर्धारित अवधि के भीतर जांच प्रतिवेदन मुख्य सचिव कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंच पाया? क्या जांच प्रक्रिया किसी प्रशासनिक जटिलता का शिकार हुई, या फिर किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अन्य कारणों से इसमें विलंब हुआ? इन सवालों का उत्तर अभी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सका है।वन विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। विशेष रूप से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय की ओर से कथित अनियमितताओं के मामलों में अब तक कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और सवालों पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सका है।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की छवि को धूमिल करने वाले तत्वों की भी पहचान की जानी चाहिए।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समयबद्ध जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करना आवश्यक होता है। ऐसे में मरवाही वन मंडल से जुड़े मामलों में जांच की वर्तमान स्थिति, कार्रवाई की प्रगति और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर शासन स्तर पर स्पष्टता अपेक्षित है।अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि मरवाही वन मंडल में कथित अनियमितताओं की जांच आखिर किस स्थिति में है, जांच प्रतिवेदन कब तक सामने आएगा, और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों के जवाब का इंतजार न केवल मरवाही क्षेत्र के लोग, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास रखने वाले सभी नागरिक कर रहे हैं।नोट इस समाचार में उल्लिखित आरोप एवं प्रश्न सार्वजनिक चर्चाओं और कथित शिकायतों के संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं। संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा।


