विकास नंद/सर्वव्यापी

प्रदेश में शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही प्रतिनियुक्ति और व्यवस्थापन व्यवस्था पर अब सख्ती शुरू हो गई है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, गरियाबंद के नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने नियमों का पालन करते हुए पात्रता से बाहर प्रतिनियुक्त किए गए कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस पहल को शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और नियम आधारित प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।इसी क्रम में पूरे छत्तीसगढ़ में व्यवस्थापन व्यवस्था की समीक्षा और सुधार की कार्रवाई तेज हो गई है। कई जिलों में नियमों के अनुरूप अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जा रहा है।इस अभियान के तहत बालोद जिले में भी जिला परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा द्वारा जारी आदेश के अनुसार चार संलग्न बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेज दिया गया है। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के पालन में की गई है।
शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि यही कार्रवाई अन्य जिलों में भी जारी रही तो लंबे समय से नियमों के विपरीत चल रही प्रतिनियुक्तियों और संलग्नीकरण पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई केवल शुरुआत मानी जा रही है और आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी नियम विरुद्ध व्यवस्थापन एवं प्रतिनियुक्तियों की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं।


