विकास नंद/सर्वव्यापी
जिले में खरीफ सीजन के दौरान धान पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग का अभियान सकारात्मक परिणाम देने लगा है। किसानों का रुझान अब मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों की ओर बढ़ रहा है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी, जलवायु अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो रही है।कृषि विभाग के अनुसार, जिले में इस खरीफ मौसम में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप ने बताया कि सरायपाली विकासखंड के ग्राम बोंदानवापाली के किसान फागू लाल कैवर्त और नंदकुमार कैवर्त इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। दोनों किसानों ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत धान के स्थान पर 0.40-0.40 हेक्टेयर भूमि में 1 जुलाई 2026 को मूंगफली की बुवाई की है।किसानों का कहना है कि धान की तुलना में मूंगफली की फसल में पानी की आवश्यकता कम होती है और इसकी लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर समय पर बुवाई किए जाने से अच्छी पैदावार और बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है।कृषि विभाग का मानना है कि जिले में धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। मूंगफली जैसी तिलहनी फसलें किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संसाधनों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं।फागू लाल कैवर्त और नंदकुमार कैवर्त की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक किसान धान के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाते हैं, तो खेती न केवल अधिक लाभकारी होगी बल्कि भविष्य की जलवायु चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम बनेगी।


