तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने मुख्यमंत्री सचिवालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंच का आरोप है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए लगातार आवेदन देने के बाद भी ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलने का अवसर नहीं मिल पाया है। मंच ने प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय उपलब्ध कराने की मांग की है।छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश कार्यालय आर्या कॉलोनी रोड, तिफरा बिलासपुर से जारी पत्र क्रमांक 509 दिनांक 16/05/2025 में प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद लोधी एवं जिलाध्यक्ष देवेन्द्र बंजारे ने प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री से मिलने का समय दिलाने का आग्रह किया है।पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा आम नागरिकों की सुविधा के लिए व्हाट्सएप नंबर 7024529444 एवं 7024826444, ईमेल आईडी तथा टेलीफोन नंबर 07712331001 सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि लोग अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से संपर्क कर सकें। लेकिन मंच का कहना है कि इन माध्यमों से लगातार संपर्क करने के बाद भी मुलाकात का अवसर नहीं मिल सका।मंच ने अपने पत्र में पूर्व में भेजे गए पत्रों का भी हवाला दिया है। जिसमें मुख्यमंत्री सचिवालय को प्रस्तुत पत्र क्रमांक 501 दिनांक 29.02.2024, पत्र क्रमांक 503 दिनांक 04.04.2024, पत्र क्रमांक 505 दिनांक 13.05.2024 एवं पत्र क्रमांक 507 दिनांक 22.08.2024 का उल्लेख किया गया है।पत्र में कहा गया है कि इन सभी पत्रों के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कराने का निवेदन किया गया था, लेकिन लंबे समय बीतने के बाद भी कोई समय निर्धारित नहीं किया गया। मंच ने इसे पीड़ादायक बताते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी संपर्क माध्यमों के बावजूद आम लोगों को मिलने का अवसर नहीं मिलता तो इन व्यवस्थाओं की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने पत्र में लिखा है कि संस्था के पदाधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत मुलाकात के लिए लगातार प्रयास किए गए। कई बार फोन, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से आवेदन भेजे गए, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं मिल पाया।मंच ने प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय से आग्रह किया है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संस्था के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के लिए विशेष रूप से समय निर्धारित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा सके।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री सचिवालय में ढाई साल से अधिक समय तक भेजे जा रहे आवेदनों के बाद भी मुख्यमंत्री से मुलाकात क्यों नहीं हो पाई? क्या आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों के लिए बनाए गए संपर्क माध्यम सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं? या फिर मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाली अर्जियों की निगरानी व्यवस्था में कहीं कमी है?छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने पूरे मामले में मुख्यमंत्री सचिवालय से जवाबदेही और शीघ्र मुलाकात की अपेक्षा जताई है।


