छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को कैसे भूल गए सरकार… क्या फिर उम्रदराज बनेंगे अध्यक्ष या युवा को मिलेगी कमान।

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सरायपाली/ विकास नंद/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने नवरात्र के शुभ अवसर पर विभिन्न निगम, मंडल आयोग और बोर्ड में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर दी है लेकिन मजे कि बात यह है कि भूपेश बघेल सरकार को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने पर बीजेपी घेरते रही है लेकिन जो सूची कल जारी हुई है उसमें छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को शामिल नहीं किए जाने से कई तरह की चर्चाएं हो रही है। छत्तीसगढ़ की मूल बोली छत्तीसगढ़ी को पूर्ववर्ती रमन सरकार के कार्यकाल में राजभाषा का दर्जा मिला था और इनके विकास के छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन किया गया था। जिसमें अध्यक्ष और सदस्यों का पदस्थापना राजनीति गलियों से हटकर साहित्यकार, पत्रकार और छत्तीसगढी की जानकारी को रखने का प्रावधान बनाए गए हैं। जिसमें रमन सरकार के समय में प्रदेश के उम्रदराज साहित्यकारों, पत्रकारों को अध्यक्ष बनाए गए। जिसमें भी रमन सरकार के समय एक विशेष वर्ग से अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर चर्चा होती रही। सर्वप्रथम अध्यक्ष श्यामलाल चतुर्वेदी,दानेश्वर शर्मा और फिर विनय पाठक को अध्यक्ष बनाए गए और सदस्यों में भी इसी वर्ग से लिया गया लेकिन छत्तीसगढ़ी भाषा को जिस स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए थी वह आज तक नहीं मिल पाया। वहीं बड़े ही दुर्भाग्य की बात रही कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के भूपेश बघेल राज में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी । जिसे लेकर बीजेपी विधायक अनुज शर्मा और अन्य भूपेश सरकार को ख़ूब घेरे मगर बड़े ही चिंता का विषय है कि लगभग सभी निगम, मंडल आयोग, बोर्ड में नियुक्ति हो गई लेकिन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में नियुक्ति नहीं किया जाना समझ से परे है। वहीं इस बार इस आयोग में पत्रकारिता जगत और ओबीसी वर्ग से अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर आवाज उठी है और कई उम्रदराज साहित्यकार, पत्रकार इस रेस में शामिल हैं लेकिन पत्रकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में इस एक वर्ग विशेष के बजाए ओबीसी वर्ग और पत्रकारिता जगत से युवा चेहरे को अध्यक्ष बनाए जाएं जो अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को लेकर निरंतर कार्य किए हो ताकि अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके न कि अब तक के अध्यक्षों की तरह एक वेतनभोगी बनकर खुद के लिखित किताबों का प्रकाशन आयोग के मद से कराए। बहरहाल देखना है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में कब तक अध्यक्ष की नियुक्ति होती है..?


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