सरायपाली/विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की विष्णु सरकार ने बीते बुधवार को ही विभिन्न निगम, मंडल आयोग, बोर्ड में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है लेकिन छत्तीसगढ़ी भाषा की उन्नति की बात पर जोर देने वाले भाजपा सरकार ने अब तक छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति नहीं की है। आखिर क्या कारण है कि इस आयोग में अब तक नियुक्ति नहीं की गई है। वहीं इस आयोग में पूर्ववर्ती रमन सरकार के समय से इस आयोग में छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए काम करने वाले, साहित्यकार, पत्रकारों को लेने का प्रावधान बनाए गए और यह पद राजनीतिक पद नहीं है। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में ही छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन हुआ है और उनके कार्यकाल में हमेशा ब्राह्मण समाज से ही उम्र दराज साहित्यकारों को अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है। जिसमें सर्वप्रथम श्यामलाल चतुर्वेदी, दानेश्वर शर्मा फिल्म विनय पाठक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई लेकिन श्याम लाल चतुर्वेदी के सिवाए छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने में किसी ने ध्यान नहीं दिया है और कांग्रेस सरकार में इस आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति तक नहीं हो सकी लेकिन इस बार विष्णु देव साय की सरकार में भी अब तक इस आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से अपने आप में बड़ा सवाल है कि आखिर इस आयोग में किस कारण से अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी। सूत्र बताते हैं कि इस आयोग के अध्यक्ष पद रामेश्वर शर्मा, रामानंद त्रिपाठी, रामेश्वर वैष्णव, नंदकिशोर शुक्ला जो विधायक सुशांत शुक्ला के बड़े पिता जी है, दुर्गा प्रसाद पारकर, रमेंद्र नाथ मिश्रा, रितुराज साहू, सहित एक युवा साहित्यकार पत्रकार भी इस दौड़ में शामिल हैं। जिसमें चर्चा है कि एक युवा साहित्यकार पत्रकार ने छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ाने के लिए न के विभिन्न सम्मेलन कराया, बल्कि दीवार लेखन, बैनर पोस्टर, स्टीकर लगाकर निरंतर अपने क्षेत्र और प्रदेश में काम किया है और वही अपने अखबार में निरंतर छत्तीसगढ़ी भाषा में एक आलेख भी लिखते हैं जो इस आयोग में अध्यक्ष के प्रबल दावेदार हैं और इनके अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ी को एक नई पहचान मिलेगी , इसमें दोमत की बात नहीं है लेकिन इन्हें ओबीसी वर्ग से होने के कारण इस पद पर नहीं बिठाने की बात कहीं जा रही है और बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में इस बार भी रमन सरकार की भांति किसी ब्राह्मण को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाएगी और अगर ऐसा किया जाता है तो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को ब्राह्मण समाज के लिए आरक्षित किया हुआ आयोग माना जाएगा। फिलहाल छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में कब तक नियुक्ति की जाती है,यह समझ से परे है। ———-//——–पत्रकारों ने कहा पत्रकारिता जगत से हो अध्यक्ष वहीं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ के विभिन्न पत्रकार संगठन के पदाधिकारियों ने पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर पत्रकारिता जगत से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष बनाए जाने की मांग कर चुके हैं। ———//————ओबीसी वर्ग से बने अध्यक्ष वहीं छत्तीसगढ़ के पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनों ने भी ओबीसी वर्ग से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष बनाए जाने पर जोर दिया है और कहा है कि इस छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में ब्राह्मण समाज से अध्यक्ष बनाए जाते हैं तो खुलकर विरोध किया जाएगा।