रायपुर, सर्वव्यापी संवाददाता।22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर से पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आतंकियों ने सुनियोजित तरीके से हिंदू पहचान की पुष्टि कर 27 निर्दोष नागरिकों को गोली मार दी। इस निर्मम हत्याकांड ने कश्मीर में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।यह घटना कोई पहली नहीं है। बीते कई दशकों से पाकिस्तानी आतंकी संगठनों द्वारा इसी प्रकार के नरसंहार दोहराए जा रहे हैं। सैकड़ों जवान, नागरिक, और पर्यटक इस हिंसा का शिकार बन चुके हैं। फिर भी सरकारों की नीतियाँ और सुरक्षा तंत्र की तैयारियाँ आतंकियों की बर्बरता रोकने में बार-बार विफल होती दिखाई दे रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न सिर्फ एक जघन्य आतंकी हमला है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियों की भारी विफलता को भी उजागर करता है। बार-बार इनपुट मिलने के बावजूद इस हमले को रोका नहीं जा सका, जो एक बहुत बड़ी चूक है।देश की जनता अब यह सवाल पूछ रही है:कब तक निर्दोषों का खून बहता रहेगा?कब तक आतंकियों को माकूल जवाब नहीं मिलेगा?क्या इस नरसंहार का भी वही पुराना रटारटाया जवाब मिलेगा – “जांच जारी है”?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिनकी छवि एक सशक्त और निर्णायक नेता की रही है, से जनता अब स्पष्ट और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है। ‘घर में घुसकर मारेंगे’ जैसे संकल्पों की पुनः प्रासंगिकता आ गई है। देशवासी चाहते हैं कि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निर्णायक सैन्य और कूटनीतिक कार्रवाई से पाकिस्तान को इसका जवाब दिया जाए।आज भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यदि इस बार भी नरसंहार का उचित बदला नहीं लिया गया तो इससे न केवल आतंकियों के हौसले बुलंद होंगे, बल्कि देरी होगी।