विकास नंद/ सर्वव्यापी/
महासमुन्द जिले सहित सरायपाली विकास खंड के अधिकांश नदी, नालों में विगत कई वर्षों से लगातार हो रहे रेत उत्खनन से नदी नालों का अस्तित्व ख़तरे में पड़ गया है व नदी नाले अपना मूल अस्तित्व खोते जा रहे हैं जिस पर शासन प्रशासन को गंभीरता पूर्वक ध्यान देनें की आवश्यकता है। शासन द्वारा जल संरक्षण कार्य हेतु हर वर्ष लाखों करोड़ों की राशि खर्च की जा रही है परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
शासन द्वारा संचालित योजना अंतर्गत चेक डेम निर्माण, फार्म पॉन्ड (खेत तालाब), कंटूर ट्रेंचिंग, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, वृक्षारोपण, आजीविका वृक्ष, सोक पिट, जल संग्रहण तालाबों का गहरीकरण तथा नाला उपचार जैसे कार्य किए जाएंगे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी कार्यों की गुणवत्ता सर्वाेच्च स्तर की होनी चाहिए।जन जागरुकता अभियान के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में विगत वर्ष व वर्तमान भूजल स्तर का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को जल स्तर में हो रहे परिवर्तनों की जानकारी मिलेगी।
गांवों में दीवार लेखन के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। साथ ही, प्रशिक्षणों के माध्यम से जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे न केवल जल की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन भी सशक्त होगा। गांवों में रैली, शपथ ग्रहण और श्रमदान के जरिए जल स्रोतों की सफाई कर जल बचाने के प्रयासों को मजबूती दी जा रही है।बहरहाल आखिर खनिज विभाग यह सब कुछ देखते जानतें हुए भी क्यों मौन धारण किए हुए हैं यह एक बड़ा सवाल बन गया है आने वाले समय में लोगों को रेत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा जहां राज्य सरकार जल संकट से निपटने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर नदी नालों को संरक्षित करने के प्रयास में लगी है वही दूसरी ओर खनिज विभाग की लापरवाही से नदी नालों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।