विकास नंद /सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में सरकार बदले हुए लगभग डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं परंतु पिछले कांग्रेस सरकार की तरह वर्तमान में साय सरकार में भी अफसरशाही हावी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में सुशासन और ज़ीरो टॉलरेंस का दावा तो किया जा रहा है परंतु धरातल पर अधिकारीयों की अपनी अलग ही मनमानी चल रही है। साय सरकार ने आमजन की समस्यायों को दूर करने की मंशा से सुशासन तिहार का आयोजन किया जिसके अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड में समाधान शिविर का आयोजित किया गया ऐसे ही सरायपाली विकास खंड के ग्राम पंचायत गेर्रा में अंतिम समाधान शिविर आयोजित किया गया था जिसमें कुछ किसानों ने पटवारी सागर गिरी गोस्वामी और ग्राम सेवक पैकरा के खिलाफ कमीशन लेने के गंभीर आरोप लगाऐ थे। दरअसल किसानों अपनी लिखित शिकायत में कहा कि फसल बीमा की राशि में 20% प्रतिशत राशि पटवारी द्वारा उनसे अवैध रूप से वसूली किया जाता है। जिसको लेकर किसानों ने समाधान शिविर पर 20 प्रतिशत अवैध वसूली को लेकर कार्यवाही की मांग के लिए लिखित में शिकायत पत्र दिया था। मामले की गंभीरता के मद्देनजर लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच आदेश जारी किया है जिसमें पटवारी सामर गिरी गोस्वामी पर किसानों द्वारा लगाएं गये आरोप सही पाए गए जिसके चलते गोस्वामी के साथ अन्य दो पटवारियों का अन्य स्थान पर तबादला किया गया है। अब एसडीएम सरायपाली द्वारा की गई स्थानांतरण की कार्यवाही से यह प्रश्न उठता है की क्या सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस निती और पारदर्शिता यही हैं।
जिस पटवारी के ऊपर सीधे पैसे मांगे जाने के आरोप लगे हैं तथा उनके नाम से लिखित शिकायत हुआ है तो उस पटवारी को निलंबित करने के बजाय अन्य स्थान पर तबादला करके क्या उसे बचाने का प्रयास किया गया है गौरतलब है कि पटवारी के ऊपर लगे आरोप सही पाये गये तभी उसका तबादला किया ,
**बहरहाल मुख्यमंत्री साय ने पटवारियों पर को यमराज की संज्ञा देते हुए कड़े शब्दों में कहा था कि पटवारी खुद यमराज समझ बैठे है पटवारी अगर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दें वो व्यक्ति स्वयं अपने जिंदा होने का सबूत देते हुए थक जाता है ऐसा अब हमारी सरकार में नही चलेगा***
परंतु सरायपाली के गेर्रा ग्राम की घटना से यह साफ जाहिर होता है कि एसडीएम सरायपाली और राजस्व विभाग का पटवारियों को संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते उनके हौसले बुलंद हैं और ग्रामीण त्रस्त अब यह सवाल उठता है कि अवैध रूप से वसूले किये पैसों को आम जनता तक वापस कराने का कार्य किया जायेगा या नहीं।या यूं कहे तो इस कार्यवाही से पटवारी को आगामी भ्रष्टाचार के लिए संरक्षण देते हुए पटवारी को सुरक्षित रुप से किसी अन्य स्थान पर स्थांतरित कर दिया गया।
मेरे इस खबर से कुछ राजस्व अधिकारियों और उनके चमचों को भारी पीड़ा हो सकती है जिसके लिए वह दर्द निवारक दवाएं अपने पास रखकर खबर पढ़ें…आने वाले अंक में राजस्व विभाग सरायपाली द्वारा भू-अर्जन में किसानों को मुआवजा राशि देने में जानबूझकर अधिकारियों द्वारा की जा रही लापरवाही पर स्पेशल स्टोरी का प्रकाशन किया जाएगा।