तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ के जनता बर ये बात गजब संतोषजनक आय कि इहाँ के उच्च न्यायालय ह अब जनहित के मुद्दा ल अपन गंभीर जिम्मेदारी समझत हवय। जऊन पीरा, जऊन तकलीफ, जऊन बेबस आवाज ह सासन–प्रशासन तक पहुँचय नइ पावत हवय, ओकर पहरू (मतलब रक्षक/प्रहरी) अब न्यायालय खुद बने हवय।लोकतंत्र मं चार ठन खंभा गिनाय जाथे जेमा विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका अऊ पत्रकारिता। अक्सर पत्रकारिता ल “चौथा स्तंभ” कहे जाथे, फेर सिरतोन बात तो ये आय कि न्यायपालिका ल लोकतंत्र के “पहला स्तंभ” मानना चाही। काबर कि ये ह संविधान के संरक्षक आय, नागरिक अधिकार के गारंटी आय।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा जी ह जब ले ईहां पदस्थ होए तब ले खुद मं कई जनहित मुद्दा ल खुदे संज्ञान मं लेके सुनवाई सुरू करे हवय। ये कदम ह सिरिफ कागज-पत्तर के मामला नइ, बल्कि ये ह पीड़ित जनता बर आशा के किरन आय। जऊन मुद्दा बर शासन-प्रशासन मौन रहिथे, ओकर जिम्मेदारी अब हाय कोट (हाईकोर्ट /छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय) उठावत हवय।आज के हालात मं पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, किसान,मजदूर के हक, आदिवासी इलाका के बुनियादी सुविधा अऊ पर्यावरण जइसने सवाल मन ल शासन ह अक्सर नजरअंदाज कर देथे। मंत्री, विधायक अऊ अफसर मन के व्यस्तता के भीतरी आम जनता के आवाज दब जाथे। एही जगह न्यायालय ह “जनता के पीरा के पहरू” (मयं बताना चाहत हव के पहरु ल हिंदी म रक्षक अऊ प्रहरी कहे जाथे) बन के खड़ा होथे।फेर ये घलो सिरोतन आय कि अदालत ह हर समस्या के स्थायी हल नइ दे सकय। न्यायपालिका ह सिरिफ शासन-प्रशासन ल जगाय सकथे, ओकरा अपन जिम्मेदारी याद कराय सकथे। असल मं, जनता के पीरा मं पहरू बन के हाय कोट ह सासन ल फेर से जवाबदेह बनावत हवय।लोकतंत्र मं न्यायपालिका के ये सक्रिय भूमिका ह सिरिफ कानून के शासन के मजबूती नइ, बल्कि आम जनता के विश्वास ल जिंदा रखत हवय। जब जनता ह देखथे कि ओकर पीरा के पहरू खुद न्यायालय बनत हवय, त ओखर भरोसा लोकतंत्र मं अउ गाड़ हो जाथे।आज के दौर मं जब सत्ता अऊ तंत्र ह अक्सर जनता के सवाल ल टार देथे, त न्यायपालिका के ये पहल ह बने उदाहरण प्रस्तुत करथे। ये बात ला याद रखे बर जरूरी आय । जनभावना अऊ जनहित ल सुने के जिम्मेदारी सब खंभा के आय, सिरिफ न्यायालय के नइ। फेर जऊन बेला हाय कोट ह जनता के पीरा मं पहरू (रक्षक / प्रहरी) बन जाथे, ओ बेला लोकतंत्र के असली आत्मा जिंदा हो जाथे। आज हमर छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी ह निश्चित रूप ले जनहित मं जऊन संज्ञान लेवत हे,ओला अब सरकार अऊ जिम्मेदार अधिकारी मन ल धियान देना चाही अऊ बार-बार मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा जी के रुद्र अवतार देखे के अधिकारी मन ल शौक हे तव फेर अपन जिम्मेदारी पूरा मत करव फेर देख हव हमर छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी ह जनहित ल लेके कामचोर, लापरवाह अधिकारी मन ल कईसे सजा देही। मय अपन ए लेख के माध्यम ले मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी ल अब्बड़-अब्बड़ धन्यवाद देवत हव,जऊन ह बिना याचिका दायर करें छत्तीसगढ़ के सीधा सादा लोगन मन के हित मं खुदे संज्ञान लेके सरकार अऊ प्रशासन ल फटकारत हवै, धन्यवाद मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी…!