विकास नंद /सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ का उच्च न्यायालय अब जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए जनहित के मुद्दों पर स्वतः संज्ञान ले रहा है। जिन आवाज़ों तक शासन-प्रशासन तक नहीं पहुँच पातीं, उनका प्रहरी (रक्षक) अब न्यायपालिका स्वयं बन गई है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा पदस्थ होने के बाद से लगातार कई अहम जनहित याचिकाओं पर स्वयं संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहे हैं। उनके इस कदम से पीड़ित जनता के लिए आशा की किरण जगी है।
पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, किसान-मजदूरों के अधिकार, आदिवासी क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाएँ और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर जब प्रशासन मौन रहता है, तब हाईकोर्ट जनता के “पीड़ा के रक्षक” के रूप में खड़ा होता है।
मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की सख्ती और सक्रियता शासन-प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने की याद दिला रही है। आमतौर पर नजरअंदाज कर दिए जाने वाले विषयों पर अब अदालत की निगरानी प्रशासन के लिए चेतावनी साबित हो रही है।
यह कदम लोकतंत्र में न्यायपालिका की असली भूमिका को जीवंत करता है।”जनहित के सवालों पर हाईकोर्ट की यह पहल न केवल कानून के शासन को मज़बूत बना रही है, बल्कि लोकतंत्र में जनता के भरोसे को और गहराई दे रही है।