विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग कार्यालय, रायपुर में आज महिला उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों की सुनवाई की गई। आयोग की पहल और संवेदनशील मध्यस्थता के परिणामस्वरूप दो महत्वपूर्ण मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकला।
पहले मामले में, बहु और सास-ससुर के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद के कारण बहु अलग रह रही थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रोत्साहित किया और परिवार की महत्ता को समझाया। परिणामस्वरूप सास-ससुर ने अपनी बहु को पुनः अपने साथ रखने की सहमति दी।
इस समझौते से परिवार टूटने की स्थिति समाप्त हुई और आपसी रिश्तों में सुधार आया।
दूसरे मामले में एक ग्राम पंचायत की महिला पंच और सरपंच के बीच कार्यक्षेत्र को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। इस विवाद के कारण पंचायत का विकास कार्य प्रभावित हो रहा था।
आयोग ने दोनों जनप्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा कर उन्हें पंचायत कार्यों में सहयोग और समन्वय का महत्व समझाया।
अंततः पंच और सरपंच ने आपसी मतभेद भुलाकर गांव के विकास के लिए साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया।आयोग ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि महिला आयोग केवल शिकायतों का निराकरण ही नहीं करता बल्कि परिवार, समाज और प्रशासनिक ढांचे में सौहार्द और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है।
संवाद और सहमति से समाधान निकालना ही महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक सामंजस्य का सशक्त माध्यम है।
इन दोनों मामलों के समाधान से यह संदेश गया है कि यदि सभी पक्ष सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं तो किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।