तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर राजधानी में पांच दिवसीय और जिला स्तर पर तीन दिवसीय राज्योत्सव का भव्य आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप राष्ट्रपति सीवी राधाकृष्णन की मौजूदगी ने इस समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। समारोह की सफलता के पीछे उच्च अधिकारियों से लेकर एक-एक कर्मचारी तक की मेहनत साफ झलक रही थी। लेकिन, इस राज्योत्सव के रंग में एक अजीब सी राजनीतिक बेरुख़ी भी घुली रही, क्योंकि भाजपाइयों में उत्साह गायब था।दरअसल, विष्णु देव साय सरकार बने दो साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन अब तक न तो विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है, न ही निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड और सहकारी बैंकों में राजनीतिक नियुक्तियां की गई हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों में गहरी नाराजगी है।संगठन के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की तुलना में प्रदेश महामंत्री पवन साय को ही भाजपा संगठन में असली शक्ति केंद्र माना जा रहा है। पार्टी में यह चर्चा जोरों पर है कि अधिकांश राजनीतिक नियुक्तियों पर अंतिम मुहर पवन साय के सुझाव पर लगती है, जिससे संगठन के कई दिग्गज खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की यह अतिसावधानी या निर्णयहीनता आने वाले समय में पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्तियां लंबित हैं, तो निगम-मंडलों में कुर्सियाँ खाली पड़ी हैं, ऐसे में जनता और कार्यकर्ताओं दोनों का विश्वास डगमगाने लगा है।अगर यही हाल रहा, तो 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार की वजह विपक्ष नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार की लापरवाही मानी जाएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कब तक संगठन और सत्ता के बीच संतुलन साध पाते हैं, या फिर यह असंतोष भाजपा के जश्न में कड़वाहट घोल देगा।


