विकास नंद/ सर्वव्यापी/

प्रदेश में इस वर्ष 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का शुभारंभ होना है, लेकिन इस बार खरीदी शुरू होने से पहले ही प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। धान खरीदी प्रारंभ होने में अब मात्र 12 दिन शेष हैं, बावजूद इसके अधिकांश समितियों में बारदानों की आपूर्ति अब तक नहीं हो सकी है। तौल मशीनों की जांच और सत्यापन का कार्य भी अधूरा पड़ा है।किसानों में बढ़ी चिंता, मौसम ने बढ़ाई मुश्किलेंप्रदेश के कई जिलों में किसानों ने अर्ली वैरायटी के धानों की कटाई आरंभ कर दी है। खेतों से निकला धान अब खलिहानों और घरों के बाहर ढेर के रूप में रखा जा रहा है। इस बीच मौसम के बदलते मिजाज से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई किसानों ने आशंका जताई है कि यदि खरीदी में विलंब हुआ, तो बारिश या नमी के कारण धान की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
किसानों का कहना है कि “हर वर्ष प्रशासनिक लापरवाही के कारण यही स्थिति बनती है। बारदानों की कमी, अधूरी मशीन जांच और टोकन वितरण में देरी से हमें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
”—कर्मचारियों की हड़ताल ने बढ़ाई सरकार की परेशानी
धान खरीदी समितियों के कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं —1. समय पर वेतन, कमीशन और सूखत राशि का भुगतान।2. धान परिवहन में देरी होने पर सूखत भुगतान और पेनाल्टी से राहत।3. कंप्यूटर ऑपरेटरों का नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग की समाप्ति।4. उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं को मध्यप्रदेश की तर्ज पर ₹3,000 मासिक भत्ता।
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों ने प्रत्येक समिति को ₹3 लाख का वार्षिक अनुदान, ईएसआईसी, भविष्य निधि और महंगाई भत्ता जैसी सुविधाएं प्रदान करने की भी मांग की है।
एक ओर सरकार खरीदी को निर्धारित तिथि पर शुरू करने के लिए प्रशासनिक तैयारियों में जुटी है, वहीं कर्मचारियों की हड़ताल और संसाधनों की कमी के कारण स्थिति जटिल होती जा रही है। किसान अब इस बात से चिंतित हैं कि यदि खरीदी में विलंब हुआ, तो उन्हें अपनी उपज को सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा।—धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, परंतु समितियों की तैयारी अधूरी है।
बहरहाल अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बारदानों की आपूर्ति, तौल मशीनों की जांच और कर्मचारियों की मांगों का समाधान शीघ्र किया जाए, ताकि किसानों को समय पर और सुगम खरीदी का लाभ मिल सके।


