राजनीति नहीं, पहचान की लड़ाई—छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को लेकर तरुण कौशिक का बड़ा बयान। - Sarvavyapi राजनीति नहीं, पहचान की लड़ाई—छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को लेकर तरुण कौशिक का बड़ा बयान। - Sarvavyapi

राजनीति नहीं, पहचान की लड़ाई—छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को लेकर तरुण कौशिक का बड़ा बयान।

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रायपुर/ब्यूरो सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान, संरक्षण और विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक ने एक विस्तृत और भावनात्मक बयान जारी करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब पूरे प्रदेश को राजनीति से ऊपर उठकर मातृभाषा के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा केवल बोलचाल का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और परंपरा का आधार है।प्रदेशाध्यक्ष कौशिक ने कहा कि वर्षों से छत्तीसगढ़ी भाषा को वह संवैधानिक और शैक्षणिक महत्व नहीं मिला, जिसकी वह हकदार है। प्रदेश में कई बार भाषा को आगे बढ़ाने की पहल हुई, परंतु राजनीतिक स्वार्थ, प्रशासनिक उपेक्षा और असंगठित प्रयासों के कारण यह आंदोलन अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी सरकार का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के सम्मान का है।छत्तीसगढिया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक ने चिंता जताई कि नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी ही मातृभाषा से दूर होती जा रही है। स्कूल, कार्यालय, सांस्कृतिक मंच और डिजिटल माध्यमों में छत्तीसगढ़ी भाषा के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी चरित्र, संस्कृति अउ गौरव के भाषा हवय। अगर हमर नवा पीढ़ी अपन भाषा ला अपनाए मं संकोच करही, त कल हमर पहचान कमजोर हो जाही।प्रदेशाध्यक्ष कौशिक ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़िया एकता मंच जल्द ही एक बड़ा अभियान शुरू करेगा। छत्तीसगढ़ी भाषा–साहित्य इतिहास संकलन अभियान। इस अभियान में लोककथाएँ, लोकगीत, पुरातन साहित्य, शब्द–संपदा, ऐतिहासिक संदर्भ, लोकनृत्य और आंदोलन की यात्रा को दस्तावेज़ीकृत कर एक व्यापक “छत्तीसगढ़ी गौरवग्रंथ” तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमन एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनाबो जेकर ऊपर आने वाली पीढ़ी गर्व करही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंच की पहल किसी दल या सरकार के खिलाफ नहीं है। उनके शब्दों में सरकार बदलत रहिथे, पर भाषा के लड़ई हमेशा बर रहिथे। ये मांग किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा के हक के लिए है।छत्तीसगढिया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक ने पूरे प्रदेश से भावुक अपील करते हुए कहा कि हम सब छत्तीसगढ़िया एक होवव। जात–पांत, पार्टी–विचारधारा, राजनीति—सबके ऊपर उठके अपन भाषा बर खड़ा होवव। आज अगर हम छत्तीसगढ़ी के खातिर नई लड़बो, त आने वाला समय हमर पहचान ला कमजोर कर देही। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई जिलों से युवाओं, साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक समूहों ने इस अपील का समर्थन करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ भर में जनजागरूकता कार्यक्रम, भाषा सम्मेलन, साहित्यिक संवाद और सांस्कृतिक यात्राएं आयोजित की जाएंगी, ताकि भाषा आंदोलन को नई ऊर्जा मिले।इस तरह प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक के बयान ने राज्य में छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर एक सकारात्मक वातावरण बना दिया है, और भाषा सम्मान का यह अभियान अब जन–आंदोलन का रूप लेने की ओर अग्रसर है।


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