संविधान हमारी स्‍वतंत्रता का संरक्षक, अस्मिता का प्रतीक है : पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे। - Sarvavyapi संविधान हमारी स्‍वतंत्रता का संरक्षक, अस्मिता का प्रतीक है : पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे। - Sarvavyapi

संविधान हमारी स्‍वतंत्रता का संरक्षक, अस्मिता का प्रतीक है : पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

दलित इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एण्‍ड इंडस्‍ट्री के संस्‍थापक अध्‍यक्ष तथा आईआईएम, जम्‍मू तथा एनआईटी श्रीनगर के अध्‍यक्ष एवं इंडो-फ्रेंच सीईओ फोरम के सदस्‍य पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे ने कहा कि संविधान हमारी स्‍वतंत्रता का संरक्षक और हमारी अस्मिता का प्रतीक है। वे महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में संविधान दिवस के अवसर पर हमारा संविधान-हमारा स्‍वाभिमान के अंतर्गत संविधान का अमृत महोत्‍सव वर्ष के तहत बुधवार, 26 नवंबर को ‘भारतीय संविधान का लोकतंत्र में योगदान’ विषय पर आयोजित व्‍याख्‍यान में बतौर मुख्‍य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। इस अवसर पर कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान मंच पर पर उपस्थित थे। पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे ने अपने भाषण में कहा कि संविधान दिवस केवल संविधान के स्‍मरण का दिन नहीं है बल्कि यह उस आत्‍मा का सम्‍मान करने का अवसर है जिसने विविधताओं से भरे देश को एक सूत्र में बांधा है। एक ऐसा देश जहाँ धर्म, भाषा, जाति, परंपराएं विद्यमान है, संविधान ने सबको एकही छतरी के नीचे समान अधिकार और सम्‍मान के साथ खड़ा किया है। यह अवसर हमें केवल गर्व ही नहीं अपितु आत्‍मचिंतन, उत्तरदायित्‍व और राष्‍ट्र निर्माण की नयी ऊर्जा भी प्रदान करता है। भारत का संविधान दुनिया के सबसे विस्‍तृत, समावेशी और प्रगतिशील संविधानों में गिना जाता है। यह दस्‍तावेज महज कानूनों का संग्रह मात्र नहीं है बल्कि हमारे अधिकारों का संरक्षक, कर्तव्‍यों का प्रेरक और लोकतंत्र का पवित्र मार्गदर्शक भी है। संविधान में निहित समाजिक न्‍याय और समानता के विस्‍तारीकरण की चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि अस्‍पृश्‍यता उन्‍मूलन, आरक्षण व्‍यवस्‍था, मूल अधिकार जैसी व्‍यवस्‍था देकर संविधान में समाज के करोड़ो लोगों को सम्मान, शिक्षा और अनेक अवसर प्रदान किए हैं। मतदान का अधिकार हो, या शिक्षा, संपत्ती, विवाह, सुरक्षा जैसे क्षेत्र में संविधान में महिलाओं को समानता की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय संविधान का लोकतंत्र में अद्वितीय योगदान है। इसके केंद्र में सभी के लिए न्‍याय और समान न्‍याय का तत्‍व है। अपने भाषण में उन्‍होंने चुनाव आयोग, डिजिटल इंडिया, अर्थव्‍यवस्‍था, राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति जैसे महत्‍वपूर्ण विषयों पर विस्‍तार से बात की। उन्‍होंने डॉ. आंबेडकर द्वारा चलाए गए चवदार तालाब और कालाराम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए इसे सामाजिक समता की दिशा में डॉ. आंबेडकर ने उठाया गया कदम बताया और डॉ. आंबेडकर को लोकतंत्र का महान चैम्पियन बताया।

अध्‍यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि हम आज के दिन डॉ. आंबेडकर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं और उनका सम्‍मान भी करते हैं। संविधान निर्माण में डॉ. आंबेडकर के योगदान का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि संविधान हर नागरिक के अधिकार की रक्षा करता है व एकता, अखंडता को सुरक्षित रखता है। संविधान में निहित न्‍याय, स्‍वतंत्रता, समता, बंधुता इन चार शब्‍दों में लोकतंत्र के सारे मूल्‍य समाहित है। संविधान हमें नैसर्गिक विधान की तरह बिना भेदभाव रास्‍ता दिखाता है। हमें इसकी खुबसुरती को समझकर व्‍यवहार में लाना चाहिए और अधिकार के साथ-साथ कर्तव्‍य के प्रति सजग भी रहना चाहिए। कुलपति ने पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे का स्‍वागत शॉल, प्रतीक चिन्‍ह, चरखा व सूतमाला से किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्‍पांजलि अर्पित कर किया गया। कुलगीत गायन सहायक प्रोफेसर डॉ. तेजस्‍वी एच. आर. एवं समूह द्वारा किया गया तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। कार्यक्रम का स्‍वागत भाषण विधि विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी ने किया। संचालन मराठी साहित्‍य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप सपकाळे ने किया तथा अनुवाद अध्‍ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मीरा निचळे ने आभार ज्ञापित किया।

इस अवसर पर विश्‍वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा संविधान जागरूकता रैली पंजाब कालोनी तक निकाली गयी, जिसका शुभारंभ कुलपति प्रो. शर्मा ने किया। इस अवसर पर बोधिसत्‍व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समता भवन के प्रांगण में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबळे व कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा माल्‍यार्पण किया गया। कुलपति की अध्‍यक्षता में संविधान की उद्देशिका का वाचन भी किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्‍या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।


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