तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर संभाग अंतर्गत मुंगेली जिले के नगर पंचायत सरगांव में स्थानांतरण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नगर पंचायत के पीआईयू आशिष सिंह ठाकुर के स्थानांतरण को निरस्त करने की मांग करते हुए विधायक सुशांत शुक्ला और वरिष्ठ भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ठाकुर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आशिष सिंह ठाकुर को यथावत पदस्थ रखा जाए।दोनों विधायकों ने दूरभाष एवं चिट्ठी लिखकर आदेशित करते हुए कहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष और सीएमओ की शिकायत के आधार पर किया गया स्थानांतरण अनुचित है और इसे तुरंत वापस लिया जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद और नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. एस. बसवराजू को भी अवगत कराया गया था।लेकिन इस पूरे मामले में चर्चा तब तेज़ हो गई जब सूडो (राज्य शहरी विकास अभिकरण) के CEO एवं जो एक डिप्टी कलेक्टर है शंशाक पांडेय ने उक्त जनप्रतिनिधियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानांतरण निरस्त नहीं किया। मामला यही दिखाता है कि सूडो के सीईओ की स्थिति और निर्णय इस मामले में जनप्रतिनिधियों के आदेशों से ज्यादा प्रभावी साबित हुए।इस घटनाक्रम के बाद जिले में यह सवाल उठ रहा है कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों के आदेश भी लागू न हों, तो प्रशासनिक व्यवस्था किस दिशा में जा रही है? सरगांव का यह मामला अब तेजी से राजनीतिक तूल पकड़ रहा है, और उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।


