तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में पत्रकारों के नियमित प्रवेश पास को लेकर जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग की ओर से केवल दैनिक समाचार पत्रों और अधिमान्य सूची में शामिल पत्रकारों के लिए पास जारी करने की अनुशंसा की जा रही है, जबकि साप्ताहिक अखबारों, मासिक पत्र–पत्रिकाओं के संपादकों और पत्रकारों को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।इस रुख ने गैर-दैनिक मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों में असंतोष को और तीखा कर दिया है। उनका कहना है कि मंत्रालय तक पहुंच किसी एक वर्ग की सुविधा नहीं, बल्कि सभी प्रकार के मीडिया के लिए समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए।जनसंपर्क विभाग के मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं, और कुछ माह पहले ही विभाग की सचिव की जिम्मेदारी डॉ. रोहित यादव को सौंपी गई है। पत्रकारों का मत है कि यदि सचिव स्तर पर इस असंतुलन को नहीं सुधारा गया, तो विभाग की यह नीति सरकार के प्रति अविश्वास को और बढ़ाएगी। पत्रकार जगत में मत स्पष्ट है—यदि भेदभावपूर्ण व्यवस्था जारी रहती है, तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।


