छत्तीसगढ़ NHM में संविदा एएनएम व फील्ड वर्करों का शोषण उजागर कम वेतन, अधिक काम और ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था से बढ़ी मुश्किलें।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा एएनएम और फील्ड वर्करों की समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। विभाग द्वारा वेतन आधा देकर काम पूरा लेने, सरकारी लाभों से वंचित रखने और केंद्र सरकार की योजनाओं का समुचित लाभ न देने के आरोप सामने आ रहे हैं। बढ़ती महंगाई के दौर में कम वेतन और बढ़ते कार्यभार ने संविदा कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति दोनों पर असर डाला है।NHM के संविदा फील्ड वर्करों के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है, लेकिन इसकी व्यवस्था व्यवहारिक नहीं बताई जा रही है। फील्ड वर्करों का कार्यक्षेत्र अलग-अलग गांव और बस्तियों में होता है, जबकि सुबह 10 बजे और शाम 5 बजे एक तय लोकेशन पर पहुंचकर जियो-लोकेशन के साथ अटेंडेंस लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद उन्हें ड्यूटी किसी अन्य स्थान पर करनी होती है, जिससे दिन में दो बार सिर्फ अटेंडेंस के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।महिला कर्मचारियों का कहना है कि 12 हजार रुपये के मासिक वेतन में आवागमन का खर्च ही पूरा वेतन खा जाता है। सरकार न तो इतना वेतन देती है कि कर्मचारी दिन में दो बार केवल ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए यात्रा कर सकें और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों की मांग है कि या तो सभी को एक समान लोकेशन सुविधा दी जाए ताकि कहीं से भी अटेंडेंस हो सके, या फिर वेतन बढ़ाकर कम से कम 40 हजार रुपये किया जाए, अथवा जिस स्थान पर अटेंडेंस देना अनिवार्य है वहां आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाए।संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि न उन्हें आवास मिलता है, न यात्रा भत्ता और न ही किसी प्रकार का अतिरिक्त इंसेंटिव। इसके बावजूद उनसे 10 से अधिक प्रकार के ऑनलाइन कार्य कराए जा रहे हैं। सिकलिन सेल, एनसीडी, आरसीएच, युविन, एचआरपी, आईडीएसपी, आयुष्मान कार्ड जैसे कार्यों की ऑनलाइन एंट्री कराई जा रही है, जिससे सभी फील्ड वर्कर डाटा एंट्री ऑपरेटर बनकर रह गए हैं। न तो इसके लिए अलग से टैबलेट या मोबाइल दिया गया है और न ही इंटरनेट रिचार्ज की सुविधा।इसके अलावा सास-बहू सम्मेलन, किशोरी बालिका कार्यक्रम जैसे अनेक आयोजन भी इन्हीं संविदा कर्मचारियों से कराए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के लिए ऊपर से फंड तो आता है, लेकिन उसका लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाता। कर्मचारियों का कहना है कि काम बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं और वेतन जस के तस हैं।संविदा एएनएम और फील्ड वर्करों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मिशन संचालक से सवाल किया है कि आखिर उनका शोषण कब तक चलता रहेगा। महंगाई के इस दौर में कम वेतन और अत्यधिक कार्यभार के कारण एएनएम कर्मचारियों का कार्य प्रभावित हो रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है और संविदा कर्मचारियों को राहत कब मिलेगी।


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