तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
सक्ती जिले के सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र कुमार चंद्रा को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी निष्कलंक, ईमानदार और सराहनीय सेवाओं के लिए कुर्मी समाज द्वारा ‘शिखर कुर्मी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान छत्तीसगढ़ कुर्मी क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित कुर्मी संझा समारोह में भव्य गरिमामय वातावरण में प्रदान किया गया, जिसमें समाज के वरिष्ठजन, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग सांसद विजय बघेल तथा विशिष्ट अतिथि बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक की उपस्थिति में नरेंद्र चंद्रा को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने नरेन्द्र कुमार चंद्रा के सेवाकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में जब प्रशासनिक सेवाओं पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, ऐसे में उनका पूरा कार्यकाल एक प्रेरणादायी उदाहरण है।सेवानिवृत्त डीईओ नरेन्द्र कुमार चंद्रा ने अपने दीर्घ सेवाकाल में शिक्षा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने अपने शासकीय जीवन की शुरुआत खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में की, इसके बाद सहायक संचालक, शिक्षा विभाग के पद पर रहते हुए मुंगेली में उल्लेखनीय योगदान दिया। आगे चलकर वे मुंगेली ,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही तथा सक्ती जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे। प्रत्येक पद पर उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, प्रशासनिक पारदर्शिता और शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए।उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वे शिक्षा विभाग के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रहे, जिन पर पूरे सेवाकाल में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता का दाग़ नहीं लगा। यही कारण है कि शिक्षा विभाग के साथ-साथ समाज में भी उनकी एक स्वच्छ, कर्मठ और अनुकरणीय छवि बनी।कुर्मी समाज के पदाधिकारियों ने सम्मान समारोह में कहा कि ‘शिखर कुर्मी सम्मान’ उन व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में समाज, शासन और जनता के लिए उत्कृष्ट योगदान दिया हो। नरेन्द्र कुमार चंद्रा ने शिक्षा के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का कार्य किया, जो समाज के लिए गर्व का विषय है।अपने सम्मान के अवसर पर नरेन्द्र कुमार चंद्रा ने कुर्मी समाज एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपने दायित्वों को सेवा भाव से निभाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत माध्यम है और यदि अधिकारी ईमानदारी से कार्य करें तो व्यवस्था अपने आप बेहतर हो सकती है।कुर्मी संझा समारोह के दौरान समाज की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। कार्यक्रम ने न केवल समाज की एकजुटता को दर्शाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना आज भी सम्मान की सबसे ऊंची कसौटी हैं।