तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ सरकार के पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन विभागीय मंत्री राजेश अग्रवाल की चुप्पी अब खुद एक बड़ा सवाल बनती जा रही है। आरोप हैं कि विभाग के भीतर लंबे समय से अनियमितताओं का खेल चल रहा है, पर न तो किसी जांच की घोषणा हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नजर आ रही है।विभागीय सूत्रों की मानें तो विभाग में हो रहे कथित भ्रष्टाचार की जड़ें मंत्री कार्यालय की निज स्थापना तक पहुंच रही हैं। कहा जा रहा है कि मंत्री के आसपास मौजूद कुछ प्रभावशाली अधिकारी ही उन्हें वास्तविक स्थिति से दूर रखे हुए हैं। इन्हीं अधिकारियों के “चक्कर” में सीधे-सादे छवि वाले मंत्री राजेश अग्रवाल की सार्वजनिक और राजनीतिक फजीहत हो रही है।सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री द्वारा अपने एक करीबी व्यक्ति को निज सचिव बनाए जाने को लेकर रही। इस नियुक्ति को लेकर न सिर्फ विभाग के भीतर बल्कि सत्ता के गलियारों में भी असहजता देखी गई। विपक्ष ने इसे योग्यता से अधिक नजदीकी का उदाहरण बताया, वहीं सरकार समर्थक खेमे में भी इस फैसले को लेकर खुलकर बचाव करते कोई नजर नहीं आया।संस्कृति,पर्यटन और धार्मिक न्यास जैसे संवेदनशील विभाग, जिनका सीधा संबंध आस्था, संस्कृति और सार्वजनिक धन से जुड़ा है, वहां करोड़ों के कथित घोटालों की चर्चाएं सरकार की छवि पर सवालिया निशान लगा रही हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते मंत्री राजेश अग्रवाल स्वयं हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच के आदेश नहीं देते, तो इसका राजनीतिक खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ सकता है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या मंत्री राजेश अग्रवाल वास्तव में सब कुछ जानते हुए भी मौन हैं,या फिर निज स्थापना में बैठे कुछ अधिकारी ही उन्हें सच से दूर रखकर अपनी ढाल बना रहे हैं?प्रदेश की जनता और विभाग से जुड़े लोग जवाब का इंतजार कर रहे हैं। चुप्पी जितनी लंबी होगी, सवाल उतने ही तीखे होते जाएंगे।