नशीले पदार्थों का उत्पादन बंद हो तभी युवा पीढ़ी नशे से बच पाएगी:जन्मजय नायक।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

उच्च.माध्य.विद्यालय पाटसेन्द्री के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई का सात दिवसीय विशेष शिविर शासकीय प्राथ.शाला डुमरपाली(गिरसा)के शाला प्रांगण में आयोजित है।नशामुक्त समाज के लिए युवा विषय पर आधारित शिविर के चतुर्थ दिवस के बौद्धिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में वंदेमातरम् सेवा संस्थान छ.ग.के उपाध्यक्ष,प्रखर एवं ओजस्वी वक्ता जन्मजय नायक तथा सेजेस भँवरपुर के शिक्षक दुर्गा प्रसाद पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि परिचय,स्वागत व मां शारदे,स्वामी विवेकानंद जी के तैलीय चित्र पर धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता की आसंदी से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जन्मजय नायक ने कहा-न रिश्तों का खयाल न खुद का,हर किसी ने अपनी जिंदगी अपने ही हाथों तबाह कर दी।किसी ने माता-पिता पर हाथ उठाया तो किसी ने पूरी जिंदगी नशे के खुमार में बिता दी।इन्होंने जिंदगी के सफर में वो राह चुन ली जिसने इन्हें तबाही की राह पर खड़ा कर दिया और वो राह थी नशे की,बुरी लत की।नायक ने आगे कहा किसी भी देश का विकास उसके नागरिकों के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।लेकिन नशे की बुराई के कारण यदि मानव स्वास्थ्य खराब होगा तो देश का विकास नहीं हो सकता।जब लोगों की नशों में खून की जगह नशा दौड़ता है तो परिवार और समाज पतन की ओर चले जाते हैं।नायक ने आगे कहा नशे के कारण चोरी,लूट-पाट,हिंसा में युवाओं की सर्वाधिक संलिप्तता इस बात का द्योतक है कि नशे ने इस देश के भविष्य को पल्लवित होने से पहले ही उसके विनाश के द्वार खोल दिए हैं।आज युवाओं में नशे कि लत इस हद तक बढ़ गई है कि खून बेचकर इस जरूरत को पूरा करता है।चार यारों के साथ शुरू हुई मस्ती उन्हें चार कंधो तक पहुँचा देती है।श्री नायक ने कहा क्या यह वही युवा पीढ़ी है जिसके कंधे में देश की बागडोर सौंपी जानी है तथा भविष्य के भारत की बुनियाद भी इसी के जिम्मे है? सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक युवाशक्ति होने का दंभ भरने वाले हम,क्या वास्तव में युवाशक्ति का उपयोग कर पा रहे हैं?क्या हम अपने युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने में कामयाब हो पा रहे हैं?पूरी युवा पीढ़ी एवं समाज को जानबूझकर मौत के मुँह में झोंकने वालों पर कभी किसी की नजर क्यों नहीं जाती?शासन-प्रशासन एक लंबे अर्से से नशा मुक्ति के लिए अनेकों जागरूकता अभियान चलाते आ रही है क्या इसकी चिरस्थाई प्रभावशीलता दिख रही है?ये तो केवल नशारूपी पेड़ के केवल तने को काट रही है। अगर इससे मुक्ति पानी है तो समूल जड़ से उखाड़ फेंकना होगा अर्थात् नशीले पदार्थों का उत्पादन ही बंद करना होगा।तभी देश के युवा पीढ़ी को नशे से बचाया जा सकता है।देश के लिए ऐसा राजस्व आमदनी किस काम का जो जहर परोसकर प्राप्त करे।नायक ने अंत में छात्रों को जागरूक करते हुए नशे से दूर रहने हेतु लालच को दूर करने और संकल्प को मजबूत करने पर जोर देते हुए अपने गीत,कविता,शायरी के अंदाज में खूब तालियाँ बटोरी।शिक्षक दुर्गा प्रसाद पटेल ने कहा आज के युवा-वर्ग के जमीनी हकीकत को देखें तो वह तमाम दुर्व्यसनों के गिरफ्त में है और उनमें से प्रमुख है नशा।नशा चाहे शराब का हो,जुए का हो या फिर इंटरनेट का,नतीजा एक ही होता है बर्बादी।उन्होंने विभिन्न दृष्टांतो के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्परिणामों तथा इससे दूर रहने की सीख दी।अंत में अतिथियों को स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी सोमेश्वर नायक,सहायक अधिकारी चेतन कुमार पटेल,सहित छात्र-छात्राएँ,ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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