तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के गृह जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का मरवाही वन मंडल इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, यहां पदस्थ रहे एक पूर्व वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) के कार्यकाल को लेकर करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।सूत्रों का दावा है कि संबंधित पूर्व डीएफओ के विरुद्ध विभागीय स्तर पर अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज़ एवं तथ्यों के साथ शिकायतें की गईं। यह भी कहा जा रहा है कि शिकायतें केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वन विभाग के उच्चाधिकारियों और विभाग के अपर मुख्य सचिव तक भी पहुंचाई गईं।हालांकि, इन शिकायतों के बावजूद अब तक किसी प्रकार की कठोर विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है। उलटे, सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारी को निलंबन या जांच के दायरे में लाने के बजाय एक अन्य जिले में अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण और सुविधाजनक पदस्थापना दी गई है, जिसे लेकर विभागीय गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।विश्वस्त सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संबंधित अधिकारी के एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी से पारिवारिक संबंध होने के कारण विभागीय स्तर पर नरमी बरते जाने की चर्चा जोरों पर है। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है।इस पूरे मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतें तथ्यपरक और प्रमाणित हैं, तो उन पर निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई की अपेक्षा स्वाभाविक है। वहीं, विभागीय चुप्पी भी संदेहों को और गहरा कर रही है।फिलहाल, यह मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के दावों के बावजूद ठोस निर्णय के इंतजार में है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इन गंभीर आरोपों पर कब और किस रूप में स्थिति स्पष्ट करता है।