छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति जल्द।

Share Now

कबीरधाम / धनंजय साहू /ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया है और इस भाषा के विकास को लेकर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन भी किया गया। जिसमें आयोग के तीन कार्यकाल में रमन शासनकाल में ब्राह्मण समाज से ही अध्यक्ष बनते रहे हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को पहचान दिलाने के बजाए एक वेतनभोगी अध्यक्ष के रूप में काम किया, जिसके कारण आज तक राजभाषा छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल पाई है और अब एक बार फिर इस आयोग में वरिष्ठ उम्रदराज साहित्यकार अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समाप्त हो चुका है और अब छत्तीसगढ़ राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड में पदाधिकारियों की नियुक्ति होने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है । ऐसे में वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मूल छत्तीसगढ़िया लोगों की इच्छा है कि डॉ रमन सिंह के कार्यकाल की भांति छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में एक विशेष वर्ग से ही पदाधिकारियों की नियुक्ति न हो और युवा साथियों को पदाधिकारियों के रुप में नियुक्ति करें जो पद का गरिमा को बनाते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा को न केवल छत्तीसगढ़ में एक कामकाजी भाषा में अपितु राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में कार्य करें ,ऐसे होनहार को ही छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हर किसी को पता है कि किसी भी राज्य की पहचान उसकी राजभाषा, संस्कृति,परंपरा, रिती रिवाज से होती है लेकिन बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के समय में तीन बार लगातार राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर एक ही समाज और वर्ग से बनाया गया जो वरिष्ठ साहित्यकार रहे और है लेकिन इस में वरिष्ठ साहित्यकार छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष दिवंगत श्याम लाल चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ी को बढ़ाने का काम किया लेकिन यह केवल अब औपचारिकता तक सिमट कर रह गया,बाकि अध्यक्षों ने कोई सराहनीय कार्य नहीं किया बल्कि एक अध्यक्ष ने आयोग के राशि से ही अपने किताबों का प्रकाशन कराते रहे । जबकि इस आयोग का पदाधिकारियों का मुख्य कार्य छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का था लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़िया सरकार बनी लेकिन छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुछ नहीं किया और अपने पांच साल के कार्यकाल में इस आयोग में अध्यक्ष की बात दूर एक सदस्य तक नहीं बना सके और भाजपा ने इस मुद्दे पर भूपेश बघेल को घेरा लेकिन विष्णु देव साय की सरकार में अब तक इस आयोग में अध्यक्ष, सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो सकी है लेकिन अब स्थानीय चुनाव निपटने के बाद कभी भी निगम, आयोग, मंडल, बोर्ड ने नियुक्ति किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है,ऐसे में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी चाहिए कि छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले व्यक्ति को ही राजनीतिक दल दल से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने वाले को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए,ताकि अन्य प्रदेशों की तरह छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। बहरहाल देखना है कि इस आयोग में विष्णु देव साय रमन की राह पर चलते हुए ब्राह्मण समाज से अध्यक्ष बनाते हैं या फिर किसी युवा पिछड़ा वर्ग के पत्रकार, साहित्यकार को जिम्मेदारी सौंपते हैं।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!