तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में कुछ आईएएस और आईपीएस अफसरों की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पूर्व सरकार के कार्यकाल में देखी गई प्रवृत्तियां एक बार फिर उभरती नजर आ रही हैं। आरोप है कि कुछ आईएएस अफसर प्रशासनिक कार्यों में खुलेआम कमीशनखोरी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे योजनाओं और जनहित के कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।वहीं, कुछ आईपीएस अफसरों पर थानेदारों के माध्यम से अवैध वसूली कराए जाने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस कथित संरक्षण के चलते कई जिलों में गैर-कानूनी गतिविधियां बेखौफ होकर चल रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय, कभी-कभी पुराने या अन्य मामलों को जोड़कर “ऊपर से” केस बनाकर पुलिस की धूमिल होती छवि सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।इन आरोपों के बीच आम जनता में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या कानून व्यवस्था वाकई निष्पक्ष हाथों में है? शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं ने सरकार और शीर्ष अधिकारियों की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर जनता के भरोसे और राज्य की कानून व्यवस्था पर पड़ेगा।