सारंगढ़–सरायपाली मार्ग बना मौत का रास्ता…दो दशक से बदहाल सड़क, धीमा निर्माण, उड़ती धूल फ्लाईऐश गाड़ियों की मनमानी से आमजन त्रस्त।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

नवागढ़–सरायपाली मुख्य मार्ग की दुर्दशा बीते लगभग दो दशकों से जस की तस बनी हुई है। यह मार्ग क्षेत्र के लिए न केवल आवागमन का प्रमुख साधन है, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक गतिविधियों की रीढ़ भी माना जाता है। बावजूद इसके, सड़क की हालत लगातार बदतर होती जा रही है और निर्माण कार्य की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।वर्तमान स्थिति यह है कि मार्ग पर जगह–जगह गड्ढे, अधूरा निर्माण, बिखरा मलबा और अनियंत्रित वाहनों की आवाजाही रोज़ हादसों को न्योता दे रही है। बीते एक माह के भीतर इसी मार्ग पर कई सड़क दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें कुछ लोगों की असमय मृत्यु भी हुई है। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य में तेजी दिख रही है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं।सड़क पर चल रही गाड़ियों से उड़ती धूल और फ्लाईऐश ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई स्थानों पर दृश्यता इतनी कम हो जाती है कि सामने से आ रहे वाहन तक दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी मार्ग से सरकार के मंत्रीगण और वरिष्ठ अधिकारी भी नियमित रूप से आवागमन करते हैं, फिर भी सड़क की हालत सुधारने की कोई ठोस इच्छा या तात्कालिक कार्रवाई नजर नहीं आती। इससे आम जनता के बीच यह सवाल गहराने लगा है कि जब जनप्रतिनिधियों की आवाजाही के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे, तो सामान्य नागरिकों की जान की कीमत आखिर कितनी आंकी जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य को तेज नहीं किया गया और सुरक्षा के पुख्ता उपाय नहीं अपनाए गए, तो यह मार्ग आने वाले दिनों में और भी घातक साबित हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि नवागढ़–सरायपाली मार्ग के निर्माण को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएं और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों की जान सुरक्षित रह सके।


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