विकास नंद/सर्वव्यापी/
सरायपाली जहाँ एक ओर शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष के अंतर्गत धान खरीदी का कार्य पूरे जोर-शोर से संचालित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध धान भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन सख्ती बरत रहा है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि धान खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त न की जाए। इसके बावजूद सरायपाली विकासखंड से सामने आ रही सूचनाएँ प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े कर रही हैं।सूत्रों के अनुसार सरायपाली विकासखंड में पदस्थ एक पटवारी पर तहसील स्तरीय अधिकारियों का कथित संरक्षण प्राप्त है। बताया जा रहा है कि इसी संरक्षण के चलते संबंधित पटवारी इन दिनों काफी प्रभावशाली भूमिका में नजर आ रहा है और धान खरीदी केंद्रों में उसकी दखलअंदाजी चर्चा का विषय बनी हुई है।सूत्र बताते हैं कि धान खरीदी से जुड़े कार्यों में किसानों, कोचियों और धान व्यापार से जुड़े लोगों से अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि “लेन-देन” के बिना काम आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा। कुछ खरीदी केंद्रों में यह चर्चा भी आम है कि संबंधित पटवारी की सहमति के बिना धान के आवक-जावक में अनावश्यक अड़चनें पैदा की जा रही हैं।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन आरोपों और चर्चाओं के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में एक पटवारी इतनी बेखौफ तरीके से काम कर रहा है। स्थानीय कर्मचारियों और आम लोगों में इसको लेकर गहरा असंतोष है, लेकिन प्रशासनिक भय के चलते वे खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो शासन की धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगना तय माना जा रहा है।