तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के सहयोग से भारतीय ज्ञान परंपरा का पाठ्यक्रम में एकीकरण विषय पर आयोजित छ: दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक की संस्कृत भाषा और साहित्य की अधिष्ठाता तथा पाठ्यक्रम की पर्यवेक्षक प्रो. कविता होले ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में रोजगार उन्मुख शिक्षा देने के उद्देश्य से भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने का कार्यक्रम शैक्षणिक पुनर्जागरण करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को भारतीयता का आत्मबोध कराया जाएगा साथ ही नवाचार को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। 02 से 07 फरवरी तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घघाटन ग़ालिब सभागार में सोमवार, 02 फरवरी को किया गया।इस अवसर पर सेंट विंसेंट पालोती इंजीनियरींग एवं टेक्नॉलॉजी महाविद्यालय, नागपुर के सहायक प्रोफेसर तथा यूजीसी मास्टर ट्रेनर डॉ. प्रफुल्ल तरवटकर ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षक केंद्र के निदेशक, साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने बताया कि भारतीय चिंतन परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करना इस प्रशिक्षण का उद्देश है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुरूप बनाया गया है, जिसमें आयुर्वेद विज्ञान और तकनीकी को भी शामिल किया गया है।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यापक एवं शोधार्थियों के साथ-साथ अन्य राज्यों के 40 से भी अधिक अध्यापक एवं शोधार्थी सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण में प्रतिदिन चार व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे तथा अंतिम दिन परीक्षा ली जाएगी। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन, मां सरस्वती के फोटो पर पुष्पाजंलि अर्पित कर तथा कुलगीत से किया गया। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल एवं सूतमाला से किया गया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर व कार्यक्रम समन्वयक डॉ. संदीप कुमार वर्मा ने किया तथा दर्शन एवं संस्कृति विभाग के सहायक प्रोफेसर व कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रणंजय कुमार सिंह ने आभार ज्ञापित किया।