मरवाही वनमंडल में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, उपवनक्षेत्रपाल पर विभागीय कार्रवाई शुरू।

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तरुण कौशिक /संपादक, सर्वव्यापी

मरवाही वनमंडल में पदस्थ उपवनक्षेत्रपाल मनीष श्रीवास्तव के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन को लेकर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। यह कार्रवाई मुख्य वनसंरक्षक, बिलासपुर वृत्त द्वारा की गई है, जिससे पूरे वनमंडल में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।जारी आदेश के अनुसार मनीष श्रीवास्तव वर्तमान में उपवनक्षेत्रपाल के पद पर पदस्थ हैं तथा पूर्व में उमरखोई समिति में पोषक अधिकारी और खोड़री परिक्षेत्र में प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे हैं। उनके विरुद्ध यह कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मरवाही द्वारा भेजे गए पत्र क्रमांक 559, दिनांक 21 जनवरी 2026 के संदर्भ में की गई है।मुख्य वनसंरक्षक कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 10 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही का निर्णय लिया गया है। आरोप पत्र के साथ अभियोजन विवरण, अभिलेखों की सूची तथा गवाहों की सूची भी संलग्न की गई है, जिनके आधार पर आरोपों की जांच की जाएगी।आरोप क्रमांक 01 : वार्षिक लेखा प्रस्तुत न करने का मामलाआरोप पत्र के अनुसार मनीष श्रीवास्तव दिनांक 19 जनवरी 2017 से 9 फरवरी 2018 तक उमरखोई समिति में पोषक अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे। इस दौरान जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मरवाही का वार्षिक लेखा वर्ष 2018-19 जिला यूनियन कार्यालय को प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण उक्त लेखा संघ मुख्यालय रायपुर को भेजा नहीं जा सका।इस संबंध में प्रबंध संचालक, जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मरवाही द्वारा विभिन्न तिथियों—19 दिसंबर 2018, 15 फरवरी 2019, 13 मार्च 2019 एवं 19 सितंबर 2019—को स्पष्टीकरण जारी किए गए, किंतु उनका कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता, लापरवाही एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना माना गया है। इस आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 तथा सहकारी अधिनियम की धारा 56(3) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।आरोप क्रमांक 02 : अग्रिम राशि का लेखा प्रस्तुत न करने का आरोपदूसरे आरोप के अनुसार मनीष श्रीवास्तव दिनांक 11 नवंबर 2024 से 15 सितंबर 2025 तक खोड़री परिक्षेत्र में प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे। इस अवधि में एन.सी.डी.सी. गोदाम क्रमांक 01 एवं 02 तथा कार्यालय मरम्मत कार्य हेतु अग्रिम राशि प्रदाय की गई थी, जिसका लेखा उनके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया।इस विषय में भी प्रबंध संचालक, जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मरवाही द्वारा 9 जुलाई 2025, 6 नवंबर 2025, 5 दिसंबर 2025 एवं 19 जनवरी 2026 को स्पष्टीकरण जारी किए गए, लेकिन इनका भी कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे वित्तीय अनुशासनहीनता एवं गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है।15 दिन में जवाब अनिवार्य, नहीं तो एकपक्षीय कार्रवाईआदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी को आरोप पत्र प्राप्ति की तिथि से 15 दिवस के भीतर अपना लिखित प्रतिवाद वनमंडलाधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि वे व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं अथवा नहीं। निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में आरोपों को स्वीकार मानते हुए एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।यदि प्रतिवाद तैयार करने हेतु अभिलेखों के अवलोकन या प्रतिलिपि की आवश्यकता होती है, तो नियमानुसार अनुमति प्रदान की जाएगी।इस पूरे मामले की प्रतिलिपि उप संचालक, अचानकमार टाइगर रिजर्व लोरमी, वनमंडलाधिकारी मरवाही तथा जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मरवाही को भी सूचनार्थ भेजी गई है।वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई से मरवाही वनमंडल में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें इस विभागीय जांच की दिशा और उसके अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।


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