तरुण कौशिक/संपादक ,सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि बिलासपुर संभाग में अपनी बेदाग, पारदर्शी और संवेदनशील कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली मरवाही वन मंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद के कुशल नेतृत्व में मरवाही वन मंडल ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया।इस अवसर पर मरवाही वन मंडल अंतर्गत स्थित बगड़ी जलाशय में पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को केंद्र में रखते हुए बर्ड वॉक, प्रशिक्षण कार्यशाला, वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान जैसे बहुआयामी कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया, जिसने क्षेत्र में संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया।कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, स्थानीय नागरिकों, प्रकृति प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बर्ड वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने जलाशय क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षी प्रजातियों को नजदीक से देखा और उनके प्राकृतिक आवास, व्यवहार एवं पारिस्थितिक महत्व के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की। बच्चों और युवाओं में पक्षियों को लेकर दिखा उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि संरक्षण की भावना जमीनी स्तर तक पहुंच रही है।प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों एवं वन अधिकारियों ने आर्द्रभूमियों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार ये जल स्रोत जल संरक्षण, जैव विविधता, पर्यावरण संतुलन और जलवायु नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का सामूहिक आह्वान किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत बगड़ी जलाशय क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया, वहीं वृक्षारोपण कर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आर्द्रभूमियां केवल जल संग्रहण स्थल नहीं, बल्कि पक्षियों एवं वन्य जीवों के सुरक्षित आवास भी हैं, जिनका संरक्षण भविष्य की आवश्यकता है।मरवाही वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर, लोगों को प्रकृति से जोड़ने और संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करने का सशक्त माध्यम बना। विभाग ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रहेगी।विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर बगड़ी जलाशय में हुआ यह आयोजन मरवाही वन मंडल को छत्तीसगढ़ में पर्यावरणीय नेतृत्व का आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करता है, जहां प्रशासन, समाज और प्रकृति एक साथ खड़े नजर आए।