हिंदी विश्वविद्यालय में ‘ठिहाना’‘डिस्कवरी ऑफ़ रूरल स्पोर्ट्स’वृत्तचित्रों का प्रदर्शन ग्रामीण जीवन और पारंपरिक खेलों पर केंद्रित रहीं प्रस्तुतियाँ।

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तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी

हमारे छत्तीसगढ़ राज्य के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के अंतर्गत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में बुधवार को ग़ालिब सभागार में ‘ठिहाना’‌ व ‘डिस्कवरी ऑफ़ रूरल स्पोर्ट्स’ इन दो वृत्त चित्रों का प्रदर्शन किया गया। ये दोनों वृत्त चित्र विश्वविद्यालय के स्नातक जनसंचार विभाग के विद्यार्थी राहुल कुमार द्वारा निर्देशित एवं प्रस्तुत किए गए। ‘ठिहाना’ वृत्त चित्र आधुनिकता के दौर में ग्रामीण जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखती है। इसमें दर्शाया गया कि किस प्रकार आधुनिकता ने ग्रामीण समाज की जीवनशैली, परंपराओं और सामाजिक संरचना को प्रभावित किया है तथा यह परिवर्तन निरंतर किस दिशा में बढ़ रहा है।वहीं ‘डिस्कवरी ऑफ़ रूरल स्पोर्ट्स’ के अंतर्गत भारत के 17 विलुप्त होते पारंपरिक ग्रामीण खेलों को दर्शाया गया। इस वृत्तचित्र में उन खेलों के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया गया है, जो समय के साथ आधुनिक खेलों के प्रभाव में हाशिए पर चले गए हैं।दोनों वृत्तचित्रों को झारखंड के गढ़वा ज़िले के स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों में फिल्माया गया। इनका प्रमुख उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सभ्यता का संरक्षण करते हुए ग्रामीण जीवन एवं परंपराओं का दस्तावेज़ीकरण करना रहा। प्रदर्शन के दौरान सभागार में उपस्थित दर्शकों ने बड़ी उत्सुकता और गंभीरता के साथ फिल्मों को देखा तथा उनमें निहित सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को समझा। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने विषय चयन और प्रस्तुति की सराहना की।


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