गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही/ नूर मोहम्मद, ब्यूरोचीफ, सर्वव्यापी

जिले के मरवाही तहसील अंतर्गत ग्राम उषाढ़ में पुराने व संरक्षित सरई (साल) वृक्षों की अवैध कटाई एवं तस्करी का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामवासियों का आरोप है कि फाटपानी मोहल्ला एवं गवरम्डी क्षेत्र में लगभग 24 नग पुराने व नए साल वृक्षों को अवैध रूप से काटकर तस्करी कर दी गई, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष मई माह में 9 नग कटे वृक्षों की जप्ती की गई थी, परंतु उसके बाद भी अवैध कटाई का सिलसिला नहीं रुका। वर्तमान में बड़े झाड़ के जंगल मद के अंतर्गत आने वाले 4 नग विशालकाय साल वृक्षों को काटकर तस्करी कर दी गई है, जो सीधे-सीधे वन कानूनों का उल्लंघन है।ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में स्थानीय वन विभाग कार्यालय में कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, किंतु बीट गार्ड एवं डिप्टी रेंजर द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है और उनका आरोप है कि स्थानीय वन अधिकारी-कर्मचारी तस्करों से मिले हुए हैं।मामले की शिकायत माननीय मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद डीएफओ द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, लेकिन जांच को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान अधिकांश कटी लकड़ियों को राजस्व मद का बताया गया, जबकि चार नग साल वृक्ष स्पष्ट रूप से बड़े झाड़ के जंगल मद के थे। इससे डीएफओ की भूमिका पर भी संदेह गहराता जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद जांच में टाल-मटोल कर अपने मातहत अधिकारियों व कर्मचारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे अवैध लकड़ी तस्करी को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है।इस पूरे मामले की लिखित शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप सहित वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भेजी गई है।शिकायतकर्ताओं में राजेश मिश्रा (अध्यक्ष, ग्राम वन प्रबंधन समिति उषाढ़), ग्राम पंचायत उषाढ़ की सरपंच, देवेंद्र सिंह मार्को सहित अनेक ग्रामवासी शामिल हैं। सभी ने सूक्ष्म, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मरवाही के जंगलों को बचाने के लिए जिम्मेदार तंत्र जागेगा या फिर साल वृक्षों की अवैध कटाई यूं ही चलती रहेगी?