चुनौतियों का सामना करते हुए महिलाएं आगे बढ़ रही हैं : प्रो. गीता भट्ट*अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी विश्‍वविद्यालय में ‘महिला सशक्तीकरण के विभिन्‍न आयाम’ विषय पर हुआ व्‍याख्‍यान।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में ‘महि‍ला सशक्तीकरण के विभिन्‍न आयाम’ विषय पर आयोजित व्‍याख्‍यान में बतौर मुख्‍य वक्‍ता संबोधित करते हुए दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय की एनसीडब्‍ल्‍युईबी की निदेशक एवं एसोशिएट प्रोफेसर प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही महि‍लाएं नेतृत्‍व करती आ रही हैं वर्तमान समय में भी अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। महिला सशक्तीकरण की दिशा में जागरण की आवश्‍यकता है। विश्‍वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्‍यक्षता में सोमवार, 09 मार्च को ग़ालिब सभागार व्‍याख्‍यान का आयोजित किया गया।इस अवसर पर आवासीय लेखिका डॉ. क्षमा कौल, आंतरिक शिकायत समिति की अध्‍यक्ष डॉ. अनुपमा गुप्‍ता और साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. अवधेश कुमार मंचासीन थे। प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि हर शताब्‍दी में महिलाओं की सफलता के कईं उदाहण मिलते हैं। इस संदर्भ में उन्‍होंने 12वीं शताब्दी में गुजरात के पाटन की रानी नायकी देवी, 16वीं शताब्दी में कर्नाटक की रानी अवक्‍का आदि की सफलता का उदाहण दिया। उन्‍होंने शिक्षा जगत में सावित्रीबाई फुले और विज्ञान में कमला सोहनी की सफलता की चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि हमारे ग्रंथ धर्म, अर्थ और काम में संतुलन की बात करते है। हमें संतुलन बनाए रखकर आगे बढ़ने की आवश्‍यकता है।अध्‍यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि सहयोग, समन्‍वय व सामंजस्‍य बनाकर विकास पथ पर चलना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि कोई भी समाज और समुदाय नैतिक साझेदारी से चलता है। महिलाओं को स्‍व को साझेदारी के साथ पुष्‍ट करना चाहिए। स्‍त्री के पास सृजन की शक्ति है और इसकी परंपरा दुर्गा, लक्ष्‍मी और सरस्‍वती से चलती आ रही है। महिलाओं ने पग-पग पर आयी बाधाओं को पार कर उंचाईयों को छुआ है।डॉ. क्षमा कौल ने सनातन परंपरा का संदर्भ देते हुए स्‍त्री चेतना पर प्रकाश डाला। डॉ. अनुपमा गुप्‍ता ने सशक्‍तीकरण के लिए सफलता प्राप्‍त करने पर बल दिया और मानवता को बचाने के लिए आगे आने की आवश्‍यकता जतायी। कार्यक्रम का स्‍वागत वक्‍तव्‍य प्रो. अवधेश कुमार ने किया।अतिथिओं का स्‍वागत शॉल, सूतमाला और विश्‍वविद्यालय का प्रतीक चिन्‍ह से किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं कुलगीत से तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। इस अवसर पर जेंडर संवेदनशीलता एवं सम्‍मान विषय पर आयोजित पोस्‍टर एवं स्‍लोगन प्रतियोगिताओं के प्रमाणपत्र विद्या‍र्थियों को प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सीमा ब‍र्गट ने किया तथा आंतरिक शिकायत समिति के विद्या‍र्थी प्रतिनिधी रवींद्र कुमार ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम कोलकाता, रिद्धपुर एवं प्रयागराज केंद्र के अध्‍यापक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी ऑनलाइन माध्‍यम से जुड़े थे। इस अवसर पर बड़ी संख्‍या में अध्‍यापक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।


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