संस्‍कृति के आदान-प्रदान का माध्‍यम है अनुवाद : प्रो. जी. गोपीनाथन*हिंदी विवि में ‘भारतीय भाषा, साहित्‍य एवं संस्‍कृति की महत्ता तथा अनुवाद की भूमिका’ विषय पर पुनश्‍चर्या कार्यक्रम का उद्घाटन।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति, सुविख्‍यात अनुवादविद प्रो. जी. गोपीनाथन ने कहा है कि अनुवाद केवल भाषा और साहित्‍य का ही नहीं अपितु संस्‍कृति के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्‍यम है। संवाद से संकट का समाधान निकालने में वैश्विक स्‍तर पर अनुवाद बड़ी भूमिका निभाता है। वें विश्‍वविद्यालय में यूजीसी- मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत ‘भारतीय भाषा, साहित्‍य एवं संस्‍कृति की महत्ता तथा अनुवाद की भूमिका’ विषय पर बारह दिवसीय पुन:श्‍चर्या कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्घाटन ग़ालिब सभागार में शुक्रवार,13 मार्च को किया गया, जिसमें विभिन्‍न राज्‍यों के अध्‍यापक शामिल हुए। प्रो. गोपीनाथन ने कहा कि भाषाओं में समन्‍वय स्‍थापित करने के लिए अनुवाद की बड़ी भूमिका है। हमारे सांस्‍कृतिक स्रोत ग्रंथ जैसे रामायण, महाभारत, गीता एवं पंचतंत्र के विभिन्‍न भाषाओं में किए गए अनुवाद के कारण इसे दुनियाभर में प्रसारित किया गया। उन्‍होंने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर, भास, शेक्‍सपीयर आदि की रचनाओं के अनुवाद से विचारों और संस्‍कृति का आदान-प्रदान हुआ। वैज्ञानिक परिवर्तन लाने में भी अनुवाद की बड़ी भूमिका रही है। अनुवाद नवनिर्मिती, प्रेरणा व ज्ञान-विज्ञान की जानकारी देने में महत्‍वपूर्ण उपकरन बना। पत्रकारिता और फिल्‍म जैसे माध्‍यमों में भी अनुवाद के कारण इसे वैश्विक पटल पर लाया गया। उन्होंने बताया कि हिंदी विश्‍वविद्यालय में अनुवाद का अध्‍ययन शुरू किया गया और भारत में पहली बार अनुवाद प्रौद्योगिकी का विभाग शुरू हुआ। देश-विदेश के साहित्‍य को विश्‍व‍ में प्रसारित करना इसके पीछे की मंशा रही। अनुवाद में रोजगार की चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि विश्‍वभर में द्विभाषी लोगों की जरूरत है। पर्यटन जैसे क्षेत्र में अनुवादकों की काफी मांग है। आज-कल मशिनी अनुवाद पर बड़ा काम हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि दुनिया के चिंतन को बदलने में और वैश्विक राजनीतिक संबंधों को सुधारने में अनुवाद एक महत्‍वपूर्ण उपकरण बना हुआ है। कार्यक्रम का प्रास्‍ताविक यूजीसी- मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. अवधेश कुमार ने किया। उन्‍होंने बारह दिन तक चलनेवाले कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कार्यक्रम में शामिल होने वाले विषय-विशेषज्ञों के व्‍याख्‍यानों का लाभ लेने का आह्वान प्रतिभागिताओं को किया। कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत से तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनुवाद अध्‍ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर तथा कार्यक्रम समन्‍वयक डॉ. राम प्रकाश यादव ने किया तथा भाषा विज्ञान विभाग के अध्‍यक्ष एवं कार्यक्रम समन्‍वयक डॉ. एच.ए. हुनगुंद ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्‍वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश कदम, डॉ. राकेश सिंह फकलियाल, डॉ. वरूण कुमार उपाध्‍याय, डॉ. राम कृपाल, डॉ. आम्रपाल शेंदरे, डॉ. प्रदीप, डॉ. जगदीश नारायण तिवारी तथा विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी डॉ. धर्मेंद्र कुमार, संजय कुमार बिसेन, गणेश कुमार तुमडाम, नागेश्‍वर दास, डॉ. कैलाश नारायण मीना, डॉ. श्रृति कुमारी, डॉ. सरोज बाला श्‍याम, डॉ. सलोचना एच.ई., डॉ. दीपक महाजन, डॉ. सुनील कुमार मानस, डॉ. संतोष एस्‍के, सुरेन्‍द्र सिंह सस्तिया आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में जनसंपर्क अधिकारी बी.एस.मिरगे, संगीता मालवीय, राजेश आगरकर, सहित हेमंत दुबे, मिथिलेश राय, विक्रांत, राम प्रवेश, जयश्री डफरे, रोहिणी गायकवाड आदि ने सहयोग किया।


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