शिक्षकों ने बनाया फर्जी कराते संघ।

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

मुंगेली जिले में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के नाम पर शिक्षा विभाग के कुछ पदस्थ शिक्षकों द्वारा फर्जी संस्था “जिला कराते संघ” बनाकर रुपये 56 लाख की राशि का गबन करने का मामला गहन चिंता का विषय बन चुका है। इस घोटाले के विरुद्ध सरगांव निवासी चैतराम साहू ने अपनी कराटे प्रशिक्षिका पत्नी सहित आमरण अनशन आरंभ कर दिया है, जिससे जिले में प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने हेतु शिक्षा विभाग में रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण नामक योजना संचालित है।शिकायतकर्ता चेतराम साहू का आरोप है कि विभाग के तीन पंचायत सहायक शिक्षकों मोहन लहरी, राजू निषाद और देव कुमार प्रधान ने फर्जी संस्था ‘जिला कराटे संघ’ की स्थापना कर बिना कराटे प्रशिक्षण दिए ही रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण हेतु निर्धारित राशि का दुरुपयोग करते हुए रुपये 56 लाख का गबन को अंजाम दिया। शिकायत के अनुसार, चेतराम साहू ने 21 मार्च 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी को तथा 18 अप्रैल 2024 को कलेक्टर जनदर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके पश्चात भी बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विभाग के अंदरूनी झगड़ों और आपसी साठ गांठ की चर्चा होने लगी है।शिकायतकर्ता के अनुसार, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर वसूली की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, परंतु विभागीय अधिकारियों ने मात्र औपचारिक जांच पूरी कर दोषियों को ‘क्लीन चिट’ दे दी। विभागीय आपसी गठजोड़ की वजह से वास्तविक जांच रोक दी गई और दोषी शिक्षकों ने विभागीय हितों के बचाव में रिश्वत के माध्यम से मामले को दबा दिया। ऐसी स्थिति में, चेतराम साहू ने यह भी उजागर किया कि असली कराटे प्रशिक्षकों को मौके से वंचित कर, नकली प्रशिक्षकों को लाभ पहुँचाया जा रहा है, जिससे शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिन्ह लग जाता है।न्याय की मांग को लेकर चेतराम साहू ने जिला मुख्यालय के आगर परिसर में सुबह 11:00 बजे से आमरण अनशन आरंभ कर दिया। मुंगेली तहसील के तहसीलदार पांडे द्वारा हस्तक्षेप के पश्चात, संयुक्त कलेक्टर जी.एल. यादव ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए डीईओ पर तीखा आरोप लगाते हुए दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। कलेक्टर राहुल देव ने भी चेतराम साहू की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी और विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।इस मामले में यह अत्यंत आवश्यक है कि जिला शिक्षा अधिकारी, मिशन संचालक तथा संबंधित विभाग के तीन शिक्षकों मोहन लहरी, राजू निषाद और देव कुमार प्रधान की भूमिका का विस्तृत और निष्पक्ष तरीके से पता लगाया जाए। इसके साथ ही, यह भी जांचा जाना चाहिए कि कैसे एक ही विभाग से कार्यरत शिक्षक, जो तनख्वाह भी प्राप्त करते हुए नकली कराटे प्रशिक्षक घोषित हो रहे हैं, रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत मानदेय प्राप्त कर रहे हैं। ऐसी स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की कड़ी निशानी भी है।शिकायतकर्ता चेतराम साहू के संघर्ष और आमरण अनशन ने प्रशासनिक स्तर पर एक नई चेतना का संचार किया है। अब यह देखना होगा कि दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई कितनी शीघ्र और पारदर्शी ढंग से की जाती है, तथा इस योजना के अंतर्गत जारी राशि के दुरुपयोग को कैसे रोका जाता है। प्रशासन एवं संबंधित विभागों से अपील की जाती है कि वे मामले की जांच को निष्पक्षता, पारदर्शिता और तत्परता के साथ आगे बढ़ाएं ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस प्रकार की घोटालों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा सकें।


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