गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में भीषण आग, गर्मी में भूख- प्यास से भटक रहे लाखों वन्य प्राणी एवं वनस्पति जलकर हुए खाक।

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कोरिया, सर्वव्यापी ,धनी लाल

कोरिया जिले में स्थित भारत का 56 वां टाइगर रिजर्व गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व विभागीय लापरवाही कारण इन दिनों भीषण आग की चपेट में है l जिसके कारण लाखों वन्य जीव, पेड़-पौधे एवं औषधि गुण वाले वनस्पति आग में जलकर खाक हो चुके हैं l लेकिन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एवं टाइगर रिजर्व के पास आग में काबू पाने के लिए कोई प्रबंध नहीं है l कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में मेंड्रा बैरियर से लेकर तुर्रीपानी तक कई किलोमीटर में भीषण आग लगी हुई है l वही रामगढ़, चुलादर, नटवाही आनंदपुर, गरनई, झाँपर, सुकतरा, सिंघौर, उज्ञाव, बघवार आदि स्थान में भी आग लगने की घटनाएं घटित हो चुकी है l भीषण आग से बचने के लिए बचे हुए जंगली जानवर रिहायसी इलाकों की ओर भाग रहे हैं जिससे कुत्तों के शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है l वहीं टाइगर रिजर्व के अधिकारी कर्मचारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं l करोड़ों का बजट प्राप्त होने के बाद भी टाइगर रिजर्व वन्य प्राणियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने में नाकाम है l जंगलों में बनाए गए स्टाप डेम साल भर में ही भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाते हैं l टाइगर रिजर्व के अंदर फलदार वृक्षों की भारी कमी है जिसके कारण वन्य जीव भोजन की तलाश में भटकते रहते हैं l अधिकारी-कर्मचारियों का उदासीन रवैया- वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उच्च अधिकारियों के दौरा नहीं करने के कारण टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी एवं पार्क परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत कभी भी टाइगर रिजर्व के भीतर भ्रमण नहीं करते और ना ही जीव जंतु एवं वृक्षों की हालात पर नजर डालते हैं l वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अधिकतर शहरी इलाकों में निवास करते हैं l जिसके कारण वन्यजीवों एवं जंगल की समस्या से अनजान रहते हैं l इसका परिणाम यह होता है कि ग्रामीणों से संपर्क टूट जाता है और वनों को आग से बचाने में असफलता ही हाथ लगती है l इतना ही नहीं वन विभाग के अधिकारी ग्राम सभाओं में भी नहीं जाते और ना ही ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीवों का महत्व बताते हैं, जिससे लोगों में जागरूकता की कमी रहती है l वहीं टाइगर रिजर्व के वन प्राणियों के लिए आने वाला करोडों का बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है l वनों में आग लगने की समस्या महुआ बीनने के सीजन से ही मंडराने लगता है लेकिन वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कभी भी ग्रामीणों से इस विषय पर खुलकर चर्चा नहीं करते और ना ही उन्हें वनों में आग नहीं लगाने की सलाह- मशवरा देते हैं l टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी लगातार हो रहे वृक्षों की कटाई रोक पाने में भी नाकामयाब साबित हो रहे हैं l टाइगर रिजर्व में वन प्राणियों के लिए आने वाला करोडों का बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है l वनों के भीतरी हिस्से पर बनाए गए स्टाफ डेम तालाब एवं अन्य जलाशयों का कोई भी अधिकारी निरीक्षण नहीं करता है और आने वाली राशियों का बंदर बाँट किया जाता है lवन प्राणियों एवं वनस्पतियों के झूठे आंकड़े – समय-समय पर वन विभाग वन्य प्राणियों एवं वनस्पतियों की गणना कराती है, लेकिन टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी बिना जंगल में घूमें ही वनस्पति एवं वन प्राणियों के गलत आंकड़े शासन को सौंप देते हैं जो जंगली जानवर वन में मौजूद नहीं रहते उनके आंकड़े भी उच्च अधिकारियों के द्वारा शासन को सौंप दिए जाते हैं l आग लगाने स्थानीय शिकारी भी सक्रिय – वनों में आग लगाने के लिए कुछ स्थानीय शिकारी भी वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर सक्रिय रहते हैं और आपदा में अवसर ढूंढते नजर आते हैं l यह शिकारी गर्मी के दिनों में जल उपलब्धता वाले इलाकों में अपना जाल फैलाकर जंगली जानवरों एवं पक्षियों का शिकार करते हैं और वन विभाग के कर्मचारी मूक दर्शक बने रहते हैं l टाइगर रिजर्व के अधिकारी कर्मचारी कभी भी जंगल के भीतरी भागों का भ्रमण नहीं करते जिससे पेड़ पौधों और जंगली जानवरों का हालत जानने में असमर्थ रहते हैं l स्थानीय मीडिया एवं जनप्रतिनिधियों से सेटिंग- इलाके में नेटवर्क नहीं होने एवं पार्क परिक्षेत्र अधिकारी एवं टाइगर रिजर्व के अधिकारियों कर्मचारियों का स्थानीय मीडिया एवं जनप्रतिनिधियों से सेटिंग होने के कारण जंगल में लगे भीषण आग एवं एवं हजारों लाखों वन्य प्राणियों की की मरने की खबर आगे तक नहीं पहुंच पाती है और लापरवाह अधिकारी-कर्मचारी कार्यवाही से बच जाते हैं l सर्वव्यापी अख़बार में पहली बार खबर प्रकाशित होने के बाद आगे देखना यह होगा कि टाइगर रिजर्व के लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है या फिर उन्हें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का संरक्षण मिलता है l


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