तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित महानदी भवन मंत्रालय में इन दिनों प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ कुछ खास रिश्तों की भी खूब चर्चा हो रही है। यहां कामकाज की व्यस्तता और जिम्मेदारियों के बीच दोस्ती की ऐसी मिसाल देखने को मिल रही है, जिसे लोग बॉलीवुड की चर्चित फिल्म शोले के जय-वीरू से जोड़कर देख रहे हैं।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सचिव सह खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के साथ मुख्यमंत्री सचिव डॉ एस बसवराजू की मित्रता को मंत्रालयीन हलकों में लंबे समय से एक मजबूत और भरोसेमंद जोड़ी के रूप में देखा जाता रहा है। प्रशासनिक फैसलों में तालमेल और आपसी समझ ने इन्हें एक ऐसी जोड़ी बना दिया है, जिसे लोग “जय-वीरू” की संज्ञा देते हैं।ठीक इसी तरह महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशंवत कुमार के निज स्थापना में पदस्थ भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश ठाकुर की जोड़ी भी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मंत्रालयीन कर्मचारियों के बीच यह जोड़ी अपनी कार्यशैली, आपसी समन्वय और दोस्ताना व्यवहार के लिए पहचानी जाती है।कर्मचारियों का कहना है कि जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग से कामकाज सुचारू रूप से चलता है, वैसे ही भैरव और सतीश की जोड़ी भी विभागीय कार्यों में बेहतर तालमेल का उदाहरण पेश कर रही है। दोनों की मित्रता न केवल व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत है, बल्कि इसका सकारात्मक असर प्रशासनिक कार्यों पर भी साफ नजर आता है।मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि जब जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ता है, तब ऐसे भरोसेमंद रिश्ते ही कार्य को सरल बनाते हैं। यही कारण है कि कर्मचारी चाहते हैं कि जैसे पी दयानंद और डॉ बसवराजू की दोस्ती वर्षों से कायम है, उसी तरह भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश ठाकुर की यह जोड़ी भी लंबे समय तक बनी रहे।प्रशासनिक दुनिया में जहां अक्सर औपचारिकता हावी रहती है, वहां इस तरह की दोस्ती यह संदेश देती है कि मजबूत रिश्ते न केवल काम को आसान बनाते हैं, बल्कि एक सकारात्मक और सहयोगी कार्यसंस्कृति को भी जन्म देते हैं।