वनमंडल को नई पहचान देने वाली आईएफएस अफसर ग्रीष्मी : नेतृत्व, संवेदनशीलता और सुशासन की मिसाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल की वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) एवं युवा आईएफएस अधिकारी ग्रीष्मी चांद का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर नहीं, बल्कि उनके प्रशासनिक योगदान, कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता का मूल्यांकन करने का भी उपयुक्त समय है। कम समय में ही उन्होंने मरवाही वनमंडल में जिस प्रकार की कार्यसंस्कृति विकसित की है, उसने उन्हें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है।वन प्रशासन को अक्सर केवल जंगलों और वन्यजीवों तक सीमित समझा जाता है, लेकिन ग्रीष्मी चांद ने यह साबित किया है कि वन विभाग जनसरोकारों, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। उनकी कार्यशैली में प्रशासनिक दृढ़ता के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही कारण है कि मरवाही वनमंडल में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।मरवाही क्षेत्र जैव विविधता, वन संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे क्षेत्र में वन संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी अधिकारी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ग्रीष्मी चांद ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए वन संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों को जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल की है। उनके नेतृत्व में विभागीय कार्यों में अनुशासन, योजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता देखने को मिली है।एक प्रशासनिक अधिकारी की वास्तविक पहचान केवल उसके आदेशों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और कार्य संस्कृति से बनती है। ग्रीष्मी चांद की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ संवाद की सकारात्मक परंपरा विकसित की। इससे विभागीय समन्वय मजबूत हुआ और कार्यों के निष्पादन में बेहतर परिणाम सामने आए। यही कारण है कि आज मरवाही वनमंडल में उनकी कार्यशैली चर्चा और प्रशंसा का विषय बनी हुई है।वर्तमान समय में जब प्रशासनिक तंत्र को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब ग्रीष्मी चांद जैसे अधिकारी यह विश्वास जगाते हैं कि ईमानदार नीयत, स्पष्ट दृष्टिकोण और सकारात्मक नेतृत्व के माध्यम से व्यवस्था में बदलाव संभव है। उनके कार्यकाल ने यह संदेश दिया है कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ग्रीष्मी चांद ने मरवाही वनमंडल को केवल प्रशासनिक रूप से नहीं, बल्कि एक नई सोच और नई ऊर्जा भी प्रदान की है। उनका समर्पण, कार्यकुशलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता आने वाले समय में भी क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।”वन संरक्षण के साथ जनविश्वास अर्जित करने वाली युवा आईएफएस अधिकारी ग्रीष्मी चांद को सर्वव्यापी परिवार की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उनके नेतृत्व में मरवाही वनमंडल निरंतर नई उपलब्धियों की ओर अग्रसर हो, यही कामना है।”


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