तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के धरती मं पानी सिरिफ एक संसाधन नइये, बल्कि खेती-किसानी, जीविका अऊ ग्रामीण जिनगी के आधार आय। बीते कुछ बछर ले बदलत मौसम, कमतिहा बरसात अऊ भू-जल स्तर के गिरावट गांव-गंवई जिनगी बर चुनौती बनत गे हे। अइसने समय मं राज्य सरकार के ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान एक महत्वपूर्ण पहल के रूप मं सामने आइस हे, जऊन ह अब सिरिफ जल संरक्षण योजना नइ रहि के ग्रामीण विकास के नवा मॉडल बनत दिखत हे।मनरेगा के माध्यम ले चलत ए अभियान के सबसे बड़े विशेषता ये आय कि एमा गांव के आम जनता के सीधा भागीदारी सुनिश्चित करे गे हे। तालाब, डबरी, स्टॉप डैम, चेक डैम, खेत तालाब अऊ नाला गहरीकरण जइसने काम सिरिफ पानी सहेजे बर नइ, बल्कि गांव के भविष्य ला सुरक्षित करे बर घलो जरूरी हवंय।आज जब देश के कई इलाका पानी के संकट ले जूझत हवंय, तऊन बखत छत्तीसगढ़ मं एक लाख ले जियादा जल संरक्षण काम के निर्माण होना निश्चित रूप ले सराहनीय कदम आय। एखर असर आने वाला बछर मं खेती, पशुपालन, मछली पालन अऊ उद्यानिकी जइसने गतिविधि मं साफ दिखाई दे सकथे।ए अभियान के दूसर मजबूत पक्ष रोजगार सृजन आय। लाखों ग्रामीण मजदूर मन ला अपन गांव मं रोजगार मिलत हे। खास बात ये आय कि एमा महिलामन के भागीदारी आधा ले जियादा हे। गांव के महिला मन जब आर्थिक रूप ले मजबूत होथें, त परिवार अऊ समाज दूनों मजबूत होथे। ए दृष्टिकोण ले ‘मोर गांव-मोर पानी’ महिला सशक्तिकरण के घलो सशक्त माध्यम बनत हे।आज के डिजिटल युग मं योजना के पारदर्शिता घलो उतकेच जरूरी हे। जियो-टैगिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डिजिटल भुगतान अऊ सामाजिक अंकेक्षण जइसने व्यवस्था ले काम के गुणवत्ता अऊ जवाबदेही मं बढ़ोतरी होवत हे। एखर ले जनता के भरोसा बढ़त हे अऊ सरकारी योजना के प्रति सकारात्मक माहौल बनत हे।फेर, सिरिफ निर्माण कर देना भर पर्याप्त नइ होही। बन चुके जल संरचना मन के नियमित देखरेख, सामुदायिक निगरानी अऊ पानी के समझदारीपूर्वक उपयोग घलो जरूरी हे। जदि गांव के लोग मन ए संरचना मन ला अपन संपत्ति समझके संजोहीं, त ए अभियान के लाभ लंबे समय तक मिलत रही।असल मं, ‘मोर गांव-मोर पानी’ ए बात के प्रमाण आय कि विकास के असली रास्ता जनता के सहभागिता ले होकर जाथे। जब शासन, पंचायत अऊ जनता एक संग मिलके काम करथें, त बदलाव निश्चित रूप ले दिखाई देथे। पानी बचत, रोजगार सृजन अऊ ग्रामीण समृद्धि के संगम बने ए अभियान आने वाला समय मं देश भर बर एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकथे।छत्तीसगढ़ आज ए संदेश देत हे कि पानी के संरक्षण सिरिफ सरकार के जिम्मेदारी नइ, बल्कि हर नागरिक के सामूहिक दायित्व आय। जदि ए सोच ला जनआंदोलन के रूप मं आगे बढ़ाए जाही, त गांव के विकास अऊ जल सुरक्षा के सपना जरूर साकार होही।