विकास नंद/सर्वव्यापी
खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की उपलब्धता एवं कृषि लागत को लेकर जागरूक करने के उद्देश्य से भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष एवं सांसद प्रतिनिधि मनोज दास ने किसानों से नैनो यूरिया के अधिकाधिक उपयोग तथा खाद की कालाबाजारी के खिलाफ सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी उत्पादन लागत कम कर सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन भी प्राप्त कर सकते हैं।मनोज दास ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं एवं तकनीकें उपलब्ध करा रही है। नैनो यूरिया इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम देने में सक्षम है। इसके उपयोग से पारंपरिक यूरिया की खपत घटती है, फसलों को आवश्यक पोषक तत्व समय पर मिलते हैं तथा मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार नैनो यूरिया का उपयोग करें और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार खाद की मांग बढ़ने पर कुछ लोग अनुचित लाभ कमाने के लिए खाद की जमाखोरी एवं कालाबाजारी का सहारा लेते हैं, जिससे वास्तविक किसानों को परेशानी होती है।मनोज दास ने स्पष्ट कहा कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर ही खाद खरीदना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अधिक कीमत देने से बचना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी, कृत्रिम कमी पैदा करने या निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग, सहकारी समिति अथवा प्रशासन को इसकी सूचना दें ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।उन्होंने कहा कि किसान अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही खाद खरीदें तथा खरीद की रसीद अवश्य लें। किसानों की जागरूकता ही कालाबाजारी पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से नैनो यूरिया को अपनाने, संतुलित खाद उपयोग करने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।उन्होंने विश्वास जताया कि जागरूक किसान, पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के समन्वय से कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।