मरवाही में हाथियों की दस्तक, वन विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल…जिला पंचायत सदस्य बूंदकुंवर मार्को के घर के समीप पहुंचे हाथी, सूचना के बाद भी नहीं पहुंची वन विभाग की टीम।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल के अंतर्गत एक बार फिर हाथियों की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार हाथियों का एक दल, जिसमें एक हथिनी अपने बच्चे के साथ भी शामिल थी, मरवाही नगर क्षेत्र में पहुंच गया और जिला पंचायत सदस्य बूंदकुंवर मार्को के निवास के समीप काफी देर तक विचरण करता रहा। इस दौरान क्षेत्र में दहशत का माहौल निर्मित हो गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथियों की मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई, लेकिन सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। इससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि यदि हाथी आक्रामक हो जाते तो किसी भी प्रकार की जनहानि या दुर्घटना हो सकती थी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होती।घटना के दौरान जिला पंचायत सदस्य बूंदकुंवर मार्को ने स्वयं हाथियों की गतिविधियों का वीडियो बनाया। वीडियो में हाथियों का दल आबादी क्षेत्र के समीप घूमता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि वन विभाग की अनुपस्थिति में नगरवासियों ने स्वयं सतर्कता और संयम का परिचय देते हुए शांतिपूर्ण तरीके से हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर खदेड़ा, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मरवाही वन मंडल में हाथियों की लगातार आवाजाही के बावजूद प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित नहीं किया गया है। हाथियों की लोकेशन ट्रैकिंग, त्वरित सूचना प्रणाली और आपातकालीन रेस्क्यू टीम की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के घर के पास हाथी पहुंच सकते हैं और सूचना के बाद भी विभागीय अमला नहीं पहुंचता, तो दूरस्थ गांवों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी दल तैनात करने चाहिए। वहीं मरवाही क्षेत्र के नागरिकों ने वन मंडल प्रशासन से इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।सवालों के घेरे में मरवाही वन मंडलहाथियों की सूचना मिलने के बाद भी टीम क्यों नहीं पहुंची?क्या मरवाही वन मंडल में त्वरित प्रतिक्रिया दल सक्रिय नहीं है?आबादी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?यदि कोई जनहानि होती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?घटना ने एक बार फिर मरवाही वन मंडल की कार्यप्रणाली और वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक अब इस मामले में विभागीय जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।


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