कवर्धा परियोजना मंडल में नवाचार नीलगिरी प्लांटेशन से बदली तस्वीर।

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अलताफ़ हुसैन, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास नियम एक स्व पोषित संस्था है जो विगत पचास वर्षों से एक ही तर्ज पर कुछ स्थलों में सागौन रोपण, प्लांटेशन, नर्सरी में रुट सूट तैयार करने से लेकर दस बीस तीस चालीस वर्षीय से उपर परिपक्व सागौन का थिनिग कर उसका व्यवसायिक करण से छ्ग राज्य वन विकास निगम अपना एवं अपने विभागीय कर्मचारियों का जीवन यापन कर राज्य सरकार को प्रति वर्ष लाभांश राशि भी दे रहा है यह क्रम वर्षों से चला आ रह है परंतु छ्ग राज्य के अनुभवी अधिकारी लकीर का फकीर बने रहने की बजाए नवीन योजनाओं के मध्यम से एक नई सोच नई व्यवस्था को अंगीकार कर छ्ग राज्य वन विकास निगम राजस्व को नई दिशा तय करने की ठान ली है इसकी शुरुआत विगत कुछ वर्षों पूर्व से प्रारंभ बांस शिल्प निर्मित वस्तुओं का उत्पाद का व्यवसायिक कार्य किया गया था वह कितना सफल था यह तो बताया नही जा सकता परंतु वर्तमान में रायपुर मुख्यालय ने हाईड्रोपोनिक स्पॉट का हरित योजना का कार्य प्रारंभ किया गया जिसमें अब घरों के,हॉल,बड़े कमरों, छतों एवं अनुपयोगी प्लाट में बगैर मिट्टी, कम पानी मे घुलन शील पदर्थ से साल भर आसानी से खेती कार्य किया जा सकता है जो आमजन कृषकों के लिए छोटे स्तर पर साग सब्जी, फल जैसे उपज के लिए अब मील का पत्थर साबित हो सकता है कुछ यही नई व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से(कवर्धा) कबीरधाम जिले के पंडारिया क्षेत्र के करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित वन क्षेत्र में माह अगस्त वर्ष 2025 में लगभग 15,000 नीलगिरी पौधों का सफल प्लांटेशन किया गया जिसके आठ दस माह के अंतराल में अब सार्थक परिणाम आने लगे है छ्ग राज्य वन विकास निगम के डिविजनल मैनेजर सुनील कुमार बच्चन साहब से जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि कबीरधाम (कवर्धा) परियोजना मंडल अंतर्गत नगर परिषद पंडारिया के कक्ष क्रमांक पी. एफ.498 बीट बदौरा टू के सर्किल कुकदुर टू ग्रास भूमि 6.45 नेट भूमि 6 हेक्टेयर मे स्थित वन ग्राम क्षेत्र में होने की वजह से कुछ व्यक्तियों द्वारा क्रांति बांध जलाशय के तराई क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया गया था जिसे छ्ग राज्य वन विकास निगम द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण ) में याचिका दायर की गई उन्होंने आगे बताया कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंततः उन्हे बेदखली का नोटिस जारी किया गया पश्चात कोर्ट अधिकारियों एवं पुलिस की उपस्थिति में उन्हे बे दखल किया गया था यह विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी कवर्धा डी.एम.श्री सुनील कुमार बच्चन ने आगे बताया कथित अतिक्रमण कारीयों द्वारा वन क्षेत्र के बड़े भूभाग में काश्तकारी खेती प्रारंभ कर लिया गया था ऐसे में टकराव की स्थिति बनी रहती वर्ष 2010 में दिल्ली स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट में लगातार न्यायिक प्रक्रिया चलती रही तथा बेदखली,की कार्यवाही कर सीमांकन सुनिश्चित किया गया कबीरधाम परियोजना मंडल के डी.एम.श्री बच्चन आगे बताते है कि हमने पंडारिया स्थित कथित वन क्षेत्र में वर्ष 2025 अगस्त में छ हेक्टेयर भू भाग में घलेंद्र कुमार मेहर तत्कालिक पंडारिया रेंजर के उपस्थिति में सागौन रोपण के बजाय नीलगिरी प्लांटेशन कार्य संपादित किया जिसके आज की तिथि में मात्र आठ से दस माह के अंतराल में पौधे न्यूनतम चार फीट एवं अधिकतम आठ से दस फीट की ऊँचाई मे सर्वाईव कर रहे है जब इस संदर्भ में कबीरधाम परियोजना मंडल के एस डी ओ पीतांबर साहू से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि छ्ग राज्य वन विकास निगम का नीलगिरी प्लांटेशन आसपास परियोजना मण्डल के मध्य खुले रूप से चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि अमूमन वन विकास निगम सदैव शासन द्वारा प्रदत्त वन भूमि क्षेत्रों में सागौन प्लांटेशन किये जाने के रूप में चिंहित किया जाता रहा है परंतु इस बार हमने सागौन जैसे इमारती काष्ठों का रोपण करने के बजाए लीक से हट कर नीलगिरी प्लांटेशन करने का बीडा उठता और प्लांटेशन लगभग सफल भी हुआ है (कवर्धा) कबीरधाम एस.डी.ओ.(डीडीएम) पीतांबर साहू आगे बताते है कि वन क्षेत्र में नीलगिरी प्लांटेशन कराने की एक वजह यह भी थी क्योंकि करीब ही क्रांति जलाशय बांध होने से इसका माकुल जल श्रोत प्राप्त होगा नीलगिरी के संदर्भ मे यह कथन है कि नदी, नाले, तालाब, पोखर, बांध,जलाशय वाले जल मग्न क्षेत्र इसके लिए बहुत उपयोगी साबित होते है यही वजह है कि नीलगिरी प्लांटेशन बांध के तराई ढलानी क्षेत्र में लगाया गया है जिसका अल्प काल में उसका साक्षात परिणाम परिलक्षित हो रहा है वन विकास निगम कवर्धा परियोजना मंडल पंडारिया क्षेत्र के युवा साहसी कार्यों के प्रति समर्पित वर्तमान रेंज अधिकारी जागेश गौड़ जिन्होंने वविनि के अनेक परियोजना मण्डल में दीर्ध कालिक रेंजर पद मे रहते हुए अपने मार्ग दर्शन मे अनेक प्लांटेशन कार्य करवा कर अनेक उपलब्धि अपने नाम मे कर रखी है उनसे चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि कक्ष क्रमांक पी. एफ. 498 मे वन क्षेत्र क्लोन क्रमांक 316 नीलगिरी प्लांटेशन बहुत कम समय में लगातार ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसकी वजह बताई कि करीब में ही क्रांति बांध है जिसकी जलश्रोत और नमी लगातार पौधों को प्राप्त हो रहा है इसके कारण इस रोहणी नक्षत्र के प्रचण्ड गर्मी में नीलगिरी पौधे अपनी हरियाली और ग्रोथ को कायम रखे हुए है वविनि कवर्धा परियोजना मंडल के पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ से स्थानीय नीलगिरी रोपण के संदर्भ मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वन विकास निगम अब सागौन विक्रय तक सीमित नही रह गया है परिवर्तित समय और काल चक्र के हिसाब से कुंठित एवं एक ही ढर्रे पर लकीर का फकीर रहने की बजाय अपना व्यवसायिक दृष्टि कोण मे विस्तारित सोच रखना प्रारंभ कर दिया है तभी तो विगत कुछ वर्षों पूर्व से पहले बांस शिल्प उसके बाद हैड्रोपोनिक हरित उत्पाद के प्रति नवीन योजनाओं को अंगीकार कर रही है अब यहाँ नीलगिरी रोपण किया गया है जो मात्र प्रति चार वर्षों तक उसका व्यवसायिक करण से चार गुणा लाभ वन विकास निगम को मिल सकता है रेंजर जागेश गौड़ उत्साह पूर्वक बताते है कि वर्तमान में इमारती काष्ठ सागौन निर्मित उत्पाद जिसे कुर्सी, टेबल पलंग,अब आम जन के लिए बीते युग की बात होते जा रही है क्योंकि बढ़ती महंगाई यह सब आम जन के पहुँच के बाहर हो चुकी है इसके लिए हमें व्यवसायिक डेवलेपमेंट की सोच रखनी होगी नीलगिरी से हमें चौदह वर्षों में तीन से चार बार उसका काष्ठ जिससे प्लायवुड, पेपर, तैयार हो रहे है तथा प्रत्येक नव निर्माण भवन में इसका उपयोग किया जा रहा है इसलिए अधिक मात्रा में नीलगिरी पौधों का रोपण आवश्यक है उन्होंने आगे कहा कि वन विकास निगम में प्रत्येक परियोजना मंडल क्षेत्र में अधिक से अधिक नर्सरी निर्माण किया जाए ताकि इसका अधिक से अधिक लाभ निगम को मिले इसके साथ ही व्यापक प्रचार प्रसार करना चाहिए ताकि डिपो काष्ठागार के मध्यम से जैसे सागौन की नीलामी सिस्टम से किया जाता था वैसे ही नीलगिरी काष्ठों की नीलामी भी किया जा सकता है पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ आगे बताते है कि इसके लिए वन विकास निगम पंचायत, निजी भूमि सहग्रहिता कर नीलगिरी रोपण एवं प्लांटेशन कर चौदह वर्षों के लिए व्यवसायिक उपयोग कर सकती है जिसमे समस्त रोपण से लेकर मैंटनेंस करने का दायित्व वन विकास निगम वहन करें पश्चात इसके एवज में उन्हे तीस प्रतिशत लाभांश राशि उन्हे दे उक्त चौदह वर्षों में प्रति तीन से चार वर्षों में उसका व्यवसायिक काष्ठो का लाभ निगम को प्राप्त होगा जैसा हरियाणा में रोपण के पूर्व ही प्लायवुड व्यवसायी संपूर्ण नीलगिरी रोपण प्लांटेशन को अनुबंधित कर लेते है यदि इसी तर्ज पर वन विकास निगम भी कार्य करे तो उसका लाभ कम समय मे प्राप्त हो सकता है जिससे तीन हिस्से का लाभ निगम तथा एक हिस्सा भूमि धारक को दिया जाए तो हमें वन क्षेत्र भूमि की आवश्यकता भी नही पड़ेगी तथा सागौन काष्ठों के साथ नीलगिरी पौधों के काष्ठों से अच्छा लाभ मिल सकेगा


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