तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल में कथित भ्रष्टाचार, चंदन सहित बहुमूल्य लकड़ियों की अवैध कटाई और तस्करी के मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मरवाही रेंज के आसपास के जंगलों में चंदन की लकड़ी की अवैध कटाई कर करोड़ों रुपये के गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। वहीं उषाढ सहित अन्य वन क्षेत्रों में भी लकड़ी की अवैध तस्करी के मामलों के सामने आने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।जानकारी के अनुसार इन मामलों को लेकर सामाजिक संगठन छत्तीसगढ़िया एकता मंच द्वारा पूर्व में शासन स्तर पर शिकायत और ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन मुख्य सचिव विकास शील ने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) व्ही. श्रीनिवास राव को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था।सूत्रों का दावा है कि तत्कालीन पीसीसीएफ द्वारा बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) मनोज पाण्डेय को कई बार स्मरण पत्र भेजकर जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई या जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से मामले को लेकर अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं।वन विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल अवैध कटाई का मामला नहीं बल्कि वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाने वाला गंभीर आर्थिक अपराध भी हो सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई।अब वन विभाग के नए नेतृत्व और वर्तमान पीसीसीएफ अरुण कुमार पाण्डेय से वन कर्मियों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों को बड़ी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि यदि लंबित शिकायतों और पूर्व में जारी निर्देशों की फाइलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने मांग की है कि मरवाही वन मंडल में कथित अवैध कटाई, लकड़ी तस्करी और वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि वन संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।फिलहाल वन महकमे और प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से लंबित इस मामले में क्या वर्तमान पीसीसीएफ अरुण कुमार पाण्डेय निर्णायक कार्रवाई कर पाएंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में विभाग की पहल और जांच की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।