तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ केवल एक नई शिकायत प्रणाली की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच संवाद के एक नए अध्याय का उद्घाटन भी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रारंभ की गई यह व्यवस्था प्रदेश के नागरिकों को अपनी शिकायत, सुझाव और प्रतिक्रिया सीधे शासन तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करती है। सरकार का दावा है कि यह प्रणाली सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करेगी। विगत वर्षों में आम जनता की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि उनकी समस्याएं कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते दम तोड़ देती हैं। आवेदन फाइलों में दब जाते हैं और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बच निकलते हैं। ऐसे समय में 1076 हेल्पलाइन नागरिकों को एक ऐसा मंच देती है, जहां शिकायत दर्ज होने के साथ ही उसका रिकॉर्ड तैयार होगा और उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या (टोकन नंबर) मिलेगी, जिससे शिकायतकर्ता अपने प्रकरण की ऑनलाइन निगरानी भी कर सकेगा। इस हेल्पलाइन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे राज्य के 42 विभागों और लगभग 8 हजार अधिकारियों से जोड़ा गया है। सरकार के अनुसार 1195 श्रेणियों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो मामला स्वतः उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा। यह व्यवस्था प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। हालांकि, किसी भी व्यवस्था की सफलता उसके तकनीकी ढांचे से नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन से तय होती है। देश के अन्य राज्यों में भी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं संचालित हैं, लेकिन कई बार शिकायतों के औपचारिक निपटारे और वास्तविक समाधान के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है। ऐसे उदाहरण यह बताते हैं कि केवल शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निराकरण होना अधिक आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार के लिए भी यही सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि शिकायतों को केवल आंकड़ों में बदलने का प्रयास किया गया, तो यह व्यवस्था भी अन्य सरकारी पोर्टलों की तरह औपचारिकता बनकर रह जाएगी। लेकिन यदि मुख्यमंत्री सचिवालय, विभागीय सचिव और जिला प्रशासन नियमित निगरानी करते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करें, तो यह प्रणाली शासन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। सरकार ने 24×7 संचालन, व्हाट्सएप एकीकरण और सचिव स्तर की मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं, जो इसकी गंभीरता को दर्शाती हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की अवधारणा का मूल आधार हाल ही में संपन्न “सुशासन तिहार” के दौरान प्राप्त जन प्रतिक्रियाएं हैं। इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि समस्याओं के त्वरित समाधान की अपेक्षा रखती है। ऐसे में 1076 हेल्पलाइन सरकार के लिए जनता का भरोसा जीतने का अवसर भी है और परीक्षा भी। अंततः कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब एक ग्रामीण किसान, एक मजदूर, एक छात्र, एक महिला या एक बुजुर्ग बिना किसी सिफारिश और दबाव के अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सके। यदि ऐसा हुआ तो 1076 केवल एक नंबर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रतीक बन जाएगा। अन्यथा यह भी सरकारी घोषणाओं की लंबी सूची में एक और नाम बनकर रह जाएगा।