विकास नंद/ सर्वव्यापी
प्रदेशभर में सोमवार को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत उत्साह और उमंग के साथ हुई। शासकीय विद्यालयों में शाला प्रवेशोत्सव मनाकर नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया गया, लेकिन सरायपाली क्षेत्र के कई शासकीय स्कूलों में व्यवस्थाओं की कमी ने इस उत्सव की चमक फीकी कर दी। स्कूल खुलने के पहले ही दिन विद्यार्थियों को न तो पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं और न ही गणवेश उपलब्ध कराया गया, जिससे पालकों और विद्यार्थियों में निराशा देखी गई।
शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों को समय पर पाठ्य पुस्तकें और गणवेश उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि पढ़ाई का कार्य पहले दिन से सुचारू रूप से प्रारंभ हो सके। इसके बावजूद सरायपाली के अनेक विद्यालयों में बच्चे खाली हाथ घर लौटे। कई अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब आवश्यक शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था पूरी नहीं थी, तो फिर प्रवेशोत्सव को औपचारिकता तक सीमित क्यों रखा गया।विद्यालयों में प्रवेशोत्सव के दौरान बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया, मिठाइयां बांटी गईं और शिक्षा के महत्व पर भाषण दिए गए, लेकिन पढ़ाई के लिए जरूरी किताबों और गणवेश की अनुपलब्धता ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए।
अभिभावकों का कहना है कि शासन की मंशा अच्छी है, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारी अधूरी होने से बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।क्षेत्र के शिक्षाविदों का भी मानना है कि शिक्षा सत्र के पहले दिन ही यदि बच्चों को किताबें और गणवेश मिल जाएं तो उनमें विद्यालय के प्रति उत्साह बढ़ता है। वहीं, आवश्यक सामग्री के अभाव में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल खुलने की तिथि पहले से तय थी और शासन के स्पष्ट निर्देश भी जारी थे, तो संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा समय रहते व्यवस्थाएं क्यों नहीं की गईं। अभिभावक मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकें और गणवेश उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
फिलहाल, सरायपाली में शाला प्रवेशोत्सव के उत्साह के बीच किताबों और गणवेश की कमी चर्चा का विषय बनी हुई है तथा जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।