तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा जगत में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पद से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, कार्यशैली और जनहित के प्रति समर्पण से बनती है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. दयानंद ऐसे ही प्रशासकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने शांत स्वभाव, पारदर्शी कार्यप्रणाली और उत्कृष्ट प्रशासनिक कौशल के बल पर शासन-प्रशासन में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। आज उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके प्रशासनिक जीवन और योगदान का स्मरण करना न केवल प्रासंगिक है, बल्कि नई पीढ़ी के अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।वर्तमान में खनिज विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे पी. दयानंद का प्रशासनिक सफर निरंतर कर्म, अनुशासन और जनसेवा का उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में विभिन्न जिलों में कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए विकास और सुशासन की अनेक सफल मिसालें स्थापित की हैं। जिस जिले में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली, वहां प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने, आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और विकास कार्यों में गति लाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।आज के दौर में जब प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर अनेक प्रकार की चर्चाएं और विवाद सामने आते रहते हैं, ऐसे समय में पी. दयानंद का व्यक्तित्व एक सकारात्मक अपवाद के रूप में दिखाई देता है। अब तक उनके कार्यकाल पर किसी प्रकार का गंभीर विवाद नहीं जुड़ा है। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता से नहीं, बल्कि उनकी संतुलित सोच, निष्पक्ष निर्णय क्षमता और सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की शैली का परिणाम है।उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनका हंसमुख और सहज स्वभाव माना जाता है। सामान्यतः उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के प्रति लोगों के मन में औपचारिकता और दूरी का भाव रहता है, लेकिन पी. दयानंद अपने व्यवहार से इस धारणा को बदलते हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से उनका संवाद सदैव सरल और सकारात्मक रहा है। यही कारण है कि वे केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं जो मानवीय संवेदनाओं को भी प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।खनिज विभाग जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, राजस्व वृद्धि और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया है। वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय में उनकी भूमिका शासन की नीतियों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनकी कार्यशैली में गंभीरता और सौम्यता का जो संतुलन दिखाई देता है, वही उन्हें विशिष्ट बनाता है।एक सफल प्रशासक की पहचान केवल फाइलों के निपटारे से नहीं होती, बल्कि उससे होती है कि वह अपने निर्णयों के माध्यम से समाज और शासन के बीच कितना विश्वास स्थापित कर पाता है। पी. दयानंद ने अपने पूरे प्रशासनिक जीवन में इसी विश्वास को मजबूत करने का कार्य किया है। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि प्रशासनिक कठोरता और मानवीय संवेदनशीलता एक साथ चल सकती हैं और यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।उनके जन्मदिवस पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पी. दयानंद उन अधिकारियों में हैं जिन्होंने पद की गरिमा को अपने आचरण से और अधिक ऊंचाई प्रदान की है। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए यही अपेक्षा है कि वे आने वाले समय में भी अपनी अनुभवसम्पन्न नेतृत्व क्षमता से प्रदेश के विकास और सुशासन को नई दिशा देते रहेंगे।आपको आज जन्मदिवस की सुअवसर पर सर्वव्यापी परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं।